इंदौर: बढ़ते सायबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और पीड़ितों को थाने स्तर पर ही तुरंत राहत दिलाने के उद्देश्य से इंदौर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा सायबर हेल्प डेस्क को मजबूत किया जा रहा है. इसी कड़ी में नगरीय क्षेत्र के सभी थानों से आरक्षक से उपनिरीक्षक स्तर तक के करीब 80 पुलिसकर्मियों को सायबर अपराधों की एक दिवसीय विशेष ट्रेनिंग दी गई.ट्रेनिंग में पुलिसकर्मियों को फाइनेंशियल ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया अपराध, डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन, फर्जी शेयर ट्रेडिंग, फर्जी लोन ऐप, ओटीपी फ्रॉड, ऑनलाइन गेमिंग-बेटिंग, ई-कॉमर्स फ्रॉड, सायबर स्टॉकिंग और सायबर बुलिंग जैसे अपराधों के तरीकों की जानकारी दी गई. साथ ही यह भी बताया गया कि पीड़ित के थाने आने पर किस प्रकार तुरंत 1930 हेल्पलाइन और पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर तत्काल राशि फ्रीज कराई जा सकती है. विशेषज्ञों ने बताया कि जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, उतनी ही राशि वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
टेक्निकल टीम ने केस स्टडी और प्रेजेंटेशन के माध्यम से किया ट्रेंड
क्राइम ब्रांच के एडीशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया, सायबर एक्सपर्ट अक्षय कुमार जाधव, सायबर सुरक्षा सलाहकार सन्नी वाधवानी और क्राइम ब्रांच की टेक्निकल टीम ने केस स्टडी और प्रेजेंटेशन के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया. प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन बुधवार को किया गया. जिसका शुभारंभ पुलिस आयुक्त की उपस्थिति में हुआ. इस दौरान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (का./व्य.) अमित सिंह, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अप./मुख्यालय) आरके सिंह एवं अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त क्राइम राजेश दंडोतिया मौजूद रहे.
टेस्ट में सफल प्रतिभागियों को दिए प्रशस्ति पत्र
पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने कहा कि इंदौर पुलिस का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक पुलिसकर्मी तकनीकी रूप से दक्ष हों, ताकि किसी भी सायबर अपराध की शिकायत पर पीड़ित को थाने स्तर पर ही तुरंत समाधान मिल सके. वहीं समापन अवसर पर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह ने प्रशिक्षण में बताई गई प्रक्रियाओं को थानों में लागू करने के निर्देश दिए. प्रशिक्षण के अंत में पुलिसकर्मियों का टेस्ट लिया. सफल प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए तथा प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया. अधिकारियों ने बताया कि इंदौर पुलिस द्वारा इस तरह के तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी लगातार जारी रहेंगे
