बेंगलुरु, 21 जनवरी (वार्ता) नयी पीढ़ी पर फोकस करने वाले आयुर्वेदिक ब्रांड कपिवा ने आयुर्वेद में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को 50 करोड़ रुपये तक के कोष की शुरुआत की घोषणा की।
कंपनी ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस फंड के माध्यम से कंपनी का उद्देश्य आयुर्वेद के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक प्रमाणिकता को मजबूत करना है। यह फंड शैक्षणिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और शोधकर्ताओं को सहयोग प्रदान करेगा, ताकि आधुनिक वैज्ञानिक और क्लिनिकल मानकों के अनुरूप आयुर्वेदिक समाधान विकसित किये जा सकें।
इस पहल के जरिये कपिवा आयुर्वेदिक अनुसंधान का ऐसा वातावरण तैयार करना चाहता है, जो वैश्विक मानकों के समकक्ष हो। नया कोष नये फॉर्मुलेशन्स, मानकीकरण, फाइटोकेमिस्ट्री, आयुर्वेद में एआई के उपयोग, प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल स्टडी, नयी प्रौद्योगिकी तथा प्रौद्योगिकी-आधारित आरोग्य के मॉडल जैसे क्षेत्रों में परियोजनाओं को समर्थन देगा।
इस कोष से मदद के लिए अनुसंधान संस्थान, पीएचडी कर रहे छात्र, डॉक्टर, अस्पताल, शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर आवेदन कर सकते हैं।
कपिवा नवाचारा कोष को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह अनुसंधान के हर चरण में सहयोग प्रदान कर सके। चयनित परियोजनाओं को वित्तीय
मदद के साथ-साथ सलाह एवं सुझाव और क्लिनिकल संसाधनों का भी सहयोग मिलेगा।
कपिवा के संस्थापक अमेव शर्मा ने कहा, “ लंबे समय तक आयुर्वेद को या तो केवल परंपरा के चश्मे से देखा गया, या फिर उसे आस्था तक सीमित कर दिया गया। हमारा मानना है कि आयुर्वेद का भविष्य परिणामों और वैज्ञानिक प्रमाणों से तय होगा। यह कोष उसी भविष्य की दिशा में हमारा दीर्घकालिक निवेश है, जहां आयुर्वेदिक उत्पादों का विकास और परीक्षण आधुनिक दवाओं की तरह हो।”
कपिवा नवाचार कोष के लिए इच्छुक शोधकर्ता, संस्थान और स्टार्टअप कपिवा की वेबसाइट पर उपलब्ध विशेष पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
