इस्लामाबाद, 21 जनवरी (वार्ता) पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने सांसदों की संपत्ति और देनदारियों की गोपनीयता बनाए रखने संबंधी चुनाव संशोधन विधेयक, 2026 को बुधवार को पारित कर दिया।
यह विधेयक सांसदों की संपत्ति के सार्वजनिक खुलासे पर कानूनी रूप से रोक लगाता है अगर ऐसा करने से सांसदों और उनके परिवारों के जीवन और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होता हो।
यह विधेयक पाकिस्तान चुनाव अधिनियम की धारा 138 में संशोधन करता है और संसद के दोनों सदनों के अध्यक्षों को निर्णय लेने का अधिकार देता है कि किसी सदस्य की संपत्ति और देनदारियों का विवरण एक सीमित अवधि के लिए सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।
यह छूट केवल तभी लागू होगी जब संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने से ‘सदस्य या उसके परिवार के जीवन या सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होने की संभावना होगी तथा इस तरह का प्रतिबंध एक बार में एक साल तक के लिए लगाया जा सकता है।
ऐसे मामलों में भी, सांसद की संपत्ति ‘इस शर्त के अधीन होगी कि संपत्ति और देनदारियों का एक पूर्ण और सच्चा विवरण गोपनीय रूप से चुनाव आयोग को प्रस्तुत किया जाएगा।’
विधेयक को पारित करने की वकालत करने वालों का तर्क है कि यह कुछ सांसदों द्वारा सामना की जाने वाली वास्तविक सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करता है, विशेष रूप से अस्थिर राजनीतिक या सुरक्षा वातावरण में। हालांकि, आलोचकों ने सार्वजनिक पारदर्शिता और निगरानी के कमजोर होने पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि निर्वाचित अधिकारियों को सार्वजनिक जांच से कानूनी रूप से खुद को बचाने की अनुमति देने से संसदीय लोकतंत्र की नींव कमजोर होगी।
इस विधेयक को अभी कानून के रूप में अनुमोदित किया जाना बाकी है, क्योंकि प्रभावी होने से पहले इसे सीनेट द्वारा मंजूरी और फिर राष्ट्रपति की सहमति की आवश्यकता होगी।
