सतना : अजब एमपी के गजब माने जाने वाले सतना में गाहे-बगाहे कुछ ऐसे अनोखे कारनामे सामने आ ही जाते हैं, जिससे जिले की ख्याति राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच जाती है. ताजा मामला मेडिकल क्षेत्र में व्याप्त घोर लापरवाही और मरीज की जान से खिलवाड़ करने से संबंधित है. जिसमें मामूली पेट दर्द का इलाज कराने पहुंचे एक पुरुष मरीज की सोनोग्राफी रिपोर्ट में पेट में गर्भाशय दिखा दिया गया, वह भी उल्टा. इतना ही नहीं बल्कि उक्त रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक द्वारा दवाएं और इंजेक्शन भी दे दिए गए. हालत बिगडऩे पर मरीज ने जब जबलपुर में दिखाया तब कहीं जाकर उसे आराम मिला.
जिले की उचेहरा नगर पंचायत के अध्यक्ष निरंजन प्रजापति ने जानकारी देते हुए बताया कि 12 जनवरी को उन्हें पेट दर्द की समस्या शुरु हुई. लिहाजा अगले दिन वे सतना पहुंचे और सबसे पहले अपनी सोनोग्राफी सतना डायग्रोस्टिक सेंटर में जाकर कराई. जहां से मिली सोनोग्राफी रिपोर्ट को लेकर वे चिकित्सक डॉ. के एल नामदेव के पास पहुंचे. निरंजन के पेट में हो रहे दर्द और सोनोग्राफी रिपोर्ट को देखने के बाद चिकित्सक द्वारा उन्हें कुछ दवाएं लिख दी गईं और एक इंजेक्शन भी लगा दिया गया. इंजेक्शन से उनका दर्द कुछ कम हो गया. लेकिन चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवा की पहली खुराक खाने के बाद एक ओर जहां उनके पेट में सूजन शुरु हो गई
वहीं दूसरी ओर उनका मल-मूत्र सब कुछ बंद हो गया. किसी तरह रात बिताने के बाद निरंजन अगले ही दिन जबलपुर चले गए और वहां पर इलाज कराया. लगभग सप्ताह भर तक चले इलाज के बाद जब उनकी तबियत ठीक हुई तब वे वापस घर लौट सके. स्वस्थ्य होने के बाद वे मंगलवार को एक बार फिर से सतना पहुंचे और उनके साथ हुए छल के बारे में मीडिया को बताया. निरंजन ने बताया कि सतना डायग्रोस्टिक सेंटर में उन्होंने जो सोनाग्राफी कराई थी उसमें उनके पेट में गर्भाशय दिखाया गया था, वह भी उल्टा. निरंजन के अनुसार इस तरह की सोनोग्राफी रिपोर्ट की वजह से न सिर्फ उनकी जान पर बन आई. बल्कि इसके चलते उन्हें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताडऩा का शिकार बन गए. उन्हें रक्तचाप, मधुमेह अथवा हृदय जैसी कोई भी बीमारी नहीं है. लेकिन सतना पहुंचकर हल्के से पेट दर्द का इलाज कराना, उन्हें अपूर्णनीय क्षति दे गया.
जांच-कार्रवाई का आश्वासन
मेडिकल क्षेत्र की घोर लापरवाही की प्रताडऩा का शिकार हुए निरंजन द्वारा मामले की शिकायत सिटी कोतवाली थाने में की गई. जहां पर उनकी शिकायत लेते हुए थाना प्रभारी रावेंद्र द्विवेदी ने आश्वस्त किया कि इस संबंध में मेडिकल काउंसिल और चिकित्साकों से राय ली जाएगी. जिसके बाद ही इस मामले में कुछ किया जा सकेगा. वहीं इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला का कहना है कि मीडिया के माध्यम से यह मामला उनके संज्ञान में आया है. लिहाजा इस मामले की जांच कराई जा रही है. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
मेडिकल क्षेत्र के चरवाहे
निरंजन के अनुसार जबलपुर में उनका उपचार कर रहे चिकित्सक द्वारा जब उनकी सोनोग्राफी रिपोर्ट और किए जा चुके इलाज के कागज देखे तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के यह टिप्पणी करने में देर नहीं लगाई कि सतना में मेडिकल क्षेत्र में ऐसे चरवाहे भी हैं, यह उनकी समझ से परे है. निरंजन के अनुसार उनके जांच-उपचार में बरती गई घोर लपरवाही की वजह से यदि उन्हें कुछ हो जाता तो एक ओर जहां उनका परिवार बेसहारा होता. वहीं दूसरी ओर उनके द्वारा समाजिक क्षेत्र में अब तक किए गए सारे कार्य धरे के धरे रह जाते. लिहाजा मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे जांच केंद्रों को बंद कर देना चाहिए.
