मत्स्य पालन गोलमेज सम्मेलन बुधवार को होगा

नयी दिल्ली, 20 जनवरी (वार्ता) मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग की ओर से द्विपक्षीय व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजार संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से 21 जनवरी को यहां समुद्री खाद्य निर्यात संवर्द्धन के विषय में राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया जायेगा।

मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की ओर से मंगलवार को बताया गया कि केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत जलीय कृषि पदार्थों का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। यह मछली और जलीय खाद्य पदार्थों के अग्रणी वैश्विक उत्पादकों में से भी एक है। वर्षों से यह क्षेत्र मुख्य रूप से जीविका संबंधी गतिविधि से विकसित होकर व्यावसायिक रूप से मजबूत, निर्यातोन्मुख अनुकूल परिवेश के रूप में परिवर्तित हो गया है, जिसमें मत्स्यपालन, चारा, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, व्यवस्था संचालन तंत्र और मूल्यवर्धन शामिल हैं। साथ ही यह लाखों छोटे, सीमांत और पारंपरिक मछुआरों तथा किसानों को निरंतर सहयोग प्रदान करता है। लक्षित योजनाओं और सुनियोजित नीतियों की सहायता से भारत आज मछली एवं मत्स्य उत्पादों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है। 2024-25 में समुद्री खाद्य पदार्थों का निर्यात 16.98 लाख टन तक पहुंच गया, जो 62,408 करोड़ रुपये के बराबर था। यह भारत के कुल कृषि निर्यात में लगभग 18 प्रतिशत योगदान देता है।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ओशेनिया और लैटिन अमेरिका तथा कैरिबियन के 83 साझेदार देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों की भागीदारी के साथ इस गोलमेज सम्मेलन का आयोजन कर रही है । विदेश मंत्रालय, मत्स्य विभाग, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए), निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी), वाणिज्य विभाग, विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी), खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) और खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), एजेंस फ्रांसेज़ डी डेवलपमेंट (एएफडी), ड्यूश गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनल ज़ुसामेनार्बीट (जीआईजेड), बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम (बीओबीपी), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें भाग लेंगे। यह सम्मेलन समुद्री खाद्य व्यापार, बाजार तक पहुंच, नियामक सहयोग और द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय साझेदारियों को गहरा करने के उभरते अवसरों पर सुव्यवस्थित संवाद को सक्षम बनाने के लिए महत्वपूर्ण राजनयिक और तकनीकी मंच के रूप में कार्य करेगा।

इस सम्मेलन के परिणामों से खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने, मत्स्य पालन संबंधी मूल्य श्रृंखलाओं में आजीविका में सुधार करने और स्थिरता, सामर्थ्य तथा समावेशी विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

 

 

 

Next Post

बालोद में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी सुचारू, 1.28 लाख से अधिक किसानों को 1462 करोड़ रुपये का भुगतान

Tue Jan 20 , 2026
बालोद, 20 जनवरी (वार्ता) छत्तीसगढ़ प्रशासन की विशेष प्राथमिकता वाली समर्थन मूल्य पर धान खरीदी योजना के अंतर्गत बालोद जिले में धान खरीदी का कार्य सफलतापूर्वक एवं सुचारू रूप से जारी है। जिले के विभिन्न धान खरीदी केन्द्रों में अब तक एक लाख 28 हजार 466 किसानों से 61 लाख […]

You May Like