ट्रंप की धमकी के बाद जंग के मुहाने पर ग्रीनलैंड, डेनमार्क ने आर्मी चीफ के नेतृत्व में तैनात की भारी फौज, अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव से आर्कटिक क्षेत्र में युद्ध की आहट

कोपेनहेगन/नुक | अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर संभावित कब्जे की धमकी के बाद डेनमार्क ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सोमवार को डेनिश सेना के प्रमुख पीटर बॉयसेन खुद एक नई सैन्य टुकड़ी के साथ ग्रीनलैंड पहुंचे, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। रॉयल डेनिश आर्मी के लड़ाकू सैनिकों ने पश्चिमी ग्रीनलैंड के कंगेरलुस्सुअक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड किया। डेनमार्क की यह सैन्य तैनाती सीधे तौर पर अमेरिका को यह संदेश देने के लिए है कि वह ग्रीनलैंड की संप्रभुता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है।

आर्कटिक में डेनमार्क के शीर्ष कमांडर मेजर जनरल सोरेन एंडरसन ने स्पष्ट किया कि यह तैनाती कोई छोटी ड्रिल नहीं बल्कि एक लंबे समय तक चलने वाला मिशन है। राजधानी नुक और कंगेरलुस्सुअक में पहले से मौजूद सैकड़ों सैनिकों के साथ अब नई टुकड़ियां भी “आर्कटिक एंड्योरेंस ट्रेनिंग” में शामिल हो रही हैं। डेनिश रक्षा मंत्री ट्रोल्स लुंड पॉलसेन ने ब्रसेल्स में नाटो प्रमुख मार्क रूट से मुलाकात कर आगाह किया है कि ग्रीनलैंड पर कोई भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई नाटो समझौते के अनुच्छेद-5 का उल्लंघन मानी जा सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर गंभीर कूटनीतिक संकट पैदा हो सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जे में लेने की बार-बार दी जा रही धमकियों ने डेनमार्क और यूरोपीय देशों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। करीब 57,000 की आबादी वाले इस द्वीप की सुरक्षा और विदेश नीति पूरी तरह डेनमार्क के नियंत्रण में है। स्थानीय नेताओं ने अमेरिका से आक्रामक रुख छोड़ने की अपील की है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन के कड़े तेवरों को देखते हुए डेनमार्क ने 2026 और उसके बाद के लिए भी बड़ी सैन्य योजनाएं तैयार कर ली हैं। ग्रीनलैंड अब न केवल एक बर्फ का द्वीप, बल्कि वैश्विक शक्तियों के बीच शक्ति प्रदर्शन का मुख्य अखाड़ा बनता जा रहा है।

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