बिना अनुमति जेल मेंं घुस प्रहरी को धमकाने वाले अधिवक्ता पर एफआईआर

जबलपुर:पाटन उप जेल में बिना अनुमति घुस स्वयं को डीआईजी का रिश्तेदार बताकर मुख्यालय तक पहुंच की धौंस दिखाते हुए महिला जेल प्रहरी को धमकाने वाले अधिवक्त के खिलाफ चली लंबी जांच पड़ताल के बाद पाटन पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।पुलिस सूत्रों के मुताबिक पाटन उप जेल में पदस्थ प्रहरी कु. रचना चौकसे पिता अशोक चौकसे 31 वर्ष 27 जुलाई 2024 को सब जेल पाटन में अपनी नियत ड्युटी में बिल बनाने का लिखित कार्य मुलाकात जाली के सामने बरामदे में बैठ कर रही थी तभी जेल में साफ सफाई करने वाला बंदी दिलीप उर्फ गजनी उर्फ अरविंद पिता माधव प्रसाद लोधी प्रहरी के पास आया, बंदी व्दारा बताया गया कि सामने मुलाकात जाली में बात करने वाला व्यक्ति बिना किसी से पूछे एवं मोबाईल जेब में रख कर बिना एंट्री कराये मुलाकात जाली के पास घुस आया एवं कैदी जमुना प्रसाद उर्फ बल्लू पिता किशोरी पटेल जिसकी मुलाकात नियमानुसार उसके परिजनो से चल रही थी.

उनसे फोन व्दारा बात करने लगे। जेल प्रहरी ने तुरंत पहुंचकर पूछा कि आप कौन है और कहा कि फोन रखिये, अपना परिचय दीजिये एवं एंट्री करवाकर आये तो अधिवक्ता सौरभ व्यास बिना कुछ बताये जेल परिसर के बाहर चले गये एवं जेल के बाहर जाकर कहने लगे। रचना ने मेरी बेइज्जती की है, इसकी नौकरी खा जाउंगा, पाटन में ऐसा कौन है जो मुझे नहीं जानता, मेरी पहचान जेल मुख्यालय तक है, मैं डीआईजी का रिश्तेदार हूं। महिला जेल प्रहरी ने पूरे मामले से सहायक अधीक्षक को अवगत कराया था। जिसके बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीस पाटन, रजिस्ट्रार मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर, महा. नदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाये भोपाल, अधीक्षक नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के. जे. जबलपुर एवं अनुविभागीय दण्डाधिकारी पाटन को सूचना दी गई थी।
रैकी के साथ वीडियो भी बनाई
सूत्रों की माने तो जेल में हुई घटना के बाद से ही सौरभ व्यास रचना चौकसे का पीछा करने लगा था। 17 अक्टूबर 2024 को जब रचना जिम गई तो सौरभ व्यास द्वारा पीछा किया गया। उसके जिम में जाने का वीडियो बनाया। इसके बाद लगातार पीछा करता रहा।
अनुविभागीय अधिकारी ने की जांच
पूरे मामले की अनुविभागीय अधिकारी पुलस पाटन द्वारा की गई। इस दौरान पीडि़ता ने साक्ष्य भी अधिकारी को सौंपे थे। मामले में चली लंबी जांच पड़ताल के बाद मामले में आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
एडीजे की समझाइश, नहीं माना
पीडि़ता के मुताबिक मामले से एडीजे पाटन को भी अवगत करया तो उन्होंने अधिवक्ता को समझाइश दी लेकिन अधिवक्ता द्वारा लगातार अपने गुर्गों से धमकी दिलवाते रहे। उसके खिलाफ आरटीआई भी लगाई थी। झूठी शिकायतें भी की गई।

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