इंदौर: भागीरथपुरा त्रासदी को लेकर राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने का फैसला लिया है. इसके तहत प्रदेश के सामान्य प्रशासन प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में पीएचई सचिव और नगरीय प्रशासन आयुक्त सदस्य सचिव होंगे. भागीरथपुरा कांड को लेकर हाईकोर्ट में चार याचिका दाखिल की गई है, जिसमें भी हाई लेवल जांच कमेटी के मांग शामिल है.भागीरथपुरा कांड का मामला राज्य सरकार के लिए बहुत बड़ी सिरदर्द बन गया है.
एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने न्यायिक जांच के मांग की है. वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट में भी दायर याचिकाओं में रिटायर्ड जज की अध्यक्षता एवं उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाने की बात कही जा रही है. उक्त भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में राज्य सरकार ने नगरीय प्रशासन अतिरिक्त प्रमुख सचिव संजय दुबे से जांच कर रिपोर्ट मांगी थी. इसके बाद ही अपर आयुक्त रोहित सिसोनियाँ को निलंबित किया गया था और निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाया गया था.
दो दिन पहले लोकसभा नेता प्रतिपक्ष ने भी सरकार को जिम्मेदार पर कारवाई करने की मांग की है. प्रदेश और स्थानीय कांग्रेस ने उक्त मुद्दे को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपना रखा है. प्रदेश विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने भी वाटर ऑडिट कर सरकार को पूरी तरह से घेर दिया है. न्याय यात्रा के बाद भाजपा सरकार की नींद उड़ गई है. कांग्रेस ने सरकार की मदद के एवज में पीड़ितों को स्वयं मदद कर सहानुभूति ले ली हैं.
राहुल गांधी ने सहज सरल स्वभाव का परिचय देकर भागीरथपुरा के रहवासियों में कांग्रेस की बात सही बताते हुए भाजपा सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है. हाईकोर्ट याचिकाओं और कांग्रेस के लगातार हमलावर रुख से बचाव के लिए राज्य सरकार ने सामान्य प्रशासन प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में पीएचई सचिव पी. नरहरि और नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे को सदस्य सचिव बनाते हर उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है. उक्त कमेटी भागीरथपुरा दूषित और जहरीले पानी देने की बारीकी से जाच कर फिर से रिपोर्ट तैयार करेगी.
