महापौर के वार्ड-70 की बस्तियों में भी पानी जहरीला

इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर का पानी कई बस्तियों में पीने लायक नहीं है. भागीरथपुरा में हुए दूषित पेयजल कांड के बाद नागरिक स्वयं के खर्च से पानी की गुणवत्ता की जांच करा रहे हैं. जांच में खुलासा हुआ है कि महापौर के वार्ड-70 की बस्तियों में भी पानी जहरीला है. यहां के पेयजल के नमूनों की लैब में कराई जांच में जानलेवा बैक्टीरिया बहुतायत में मिले हैं.‘नवभारत’ ने 3 जनवरी के अंक में ‘महापौर के पुराने वार्ड में भी भागीरथपुरा की दहशत’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। दूषित पेयजल की शिकायत नगर निगम के ऐप-311, सीएम हेल्पलाइन-181 और प्रशासन की जनसुनवाई पर भी की गई है, मगर अभी तक प्रशासन और निगम की नींद नहीं टूटी है.

प्रभावित लोगों का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो माननीय न्यायालय की शरण ली जाएगी. इसे दुर्भाग्य ही कह सकते हैं कि कोई पानी पीने से ही मर जाए. भागीरथपुरा ने यह व्यथा झेली है और इस तरह के आसार वार्ड 70 की बस्तियों में भी नजर आ रहे हैं. ‘नवभारत’ ने अपने पिछले अंक में यहां के रहवासियों की पानी संबंधी पीड़ा उजागर की थी. लोगों ने बताया था कि उनके यहां मटमैला और बदबूदार पानी आ रहा है. नगर निगम ने भागीरथपुरा में हुए दूषित पेयजल कांड के बाद भी यहां के नागरिकों की सुध नहीं ली. नागरिक स्वयं के खर्च से पानी की गुणवत्ता की जांच करा रहे हैं.

वार्ड-70 की कालोनी जय जलाराम नगर के रहवासी मनोज प्रजापत ने अपने यहां निगम से जलप्रदाय होने वाले पीने के पानी के नमूनों की जांच स्नेह नगर स्थित एक्यूसी लैब्स प्राइवेट लिमिटेड पर कराई है. इस जांच ने रहवासियों की नींद उड़ा दी है, मगर निगम की नींद नहीं टूट रही है. इस पीने के पानी में मलमूत्र पाया गया है. 100 एमएल पानी में जानलेवा कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया की उपस्थिति 1600 बताई गई है, जबकि पीने के पानी में ये बैक्टीरया होना ही नहीं चाहिए. जांच में टर्बिडिटीयाने गंदगी अधिकतम 1.0 हो सकती है, मगर यहां के पानी में यह 6.5 पाई गई है. इन खतरनाक जीवाणुओं के संपर्क में आने वाले व्यक्ति का पेट खराब हो सकता है. उसे उल्टी, बुखार या दस्त भी हो सकते हैं. एक तरह से यह धीमा जहर है, जो किडनी और लीवर को भी नुकसान पहुंचाता है.

निजी खर्च पर पानी की जांच करवाई
वार्ड-70 की कालोनी जय जलाराम नगर के रहवासी मनोज प्रजापति का कहना है कि उन्होंने नगर निगम को गंदे पानी की कई बार शिकायत की है, मगर कोई सुनता ही नहीं. वार्ड पार्षद भारत रघुवंशी को इस समस्या से अवगत कराया था, मगर नतीजा सिफर ही रहा। नगर निगम के अभियंता को दूषित पानी के बारे में बताया तो उन्होंने कहा-इस पर काम हो रहा है. कल से ही साफ पानी आने लगेगा. लेकिन उनका कल, आज तक नहीं आया है. मनोज ने दूषित पेयजल की शिकायत सीएम हेल्पलाइन नंबर-181 पर की है. इंदौर नगर निगम के एप-311 पर भी उनकी शिकायत दर्ज है पर इस मर्ज का कोई इलाज नहीं हो रहा है. अपने निजी खर्च पर उन्होंने एक्यूसी लैब्स पर 2360 रुपए में जांच कराई है, जिसमें पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक बात कही गई है. यह पानी पीने के लायक तो कतई नहीं है. इसका लगातार सेवन करने से भागीरथपुरा की पुनरावृत्ति हो सकती है. गौरतलब है कि यह वार्ड महापौर पुष्यमित्र भार्गव का निवास क्षैत्र रहा है. यहां वार्ड क्र. 2 में स्थित चंदन नगर पेयजल टंकी और वार्ड क्र.70 में स्थित राजमोहल्ला पेयजल टंकी से जलप्रदाय होता है.

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