महाभारत समागम में नेत्रपट ने चेतना और विवेक पर छेड़ी गहन विमर्श की धारा

भोपाल। वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित महाभारत समागम के तीसरे दिन बहिरंग मंच पर लोकछंदा, नई दिल्ली की नृत्य-नाटिका नेत्रपट ने दर्शकों को गहरे वैचारिक और संवेदनात्मक स्तर पर प्रभावित किया। मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाट्यकृति ने महाभारत को समकालीन दृष्टि से पुनर्पाठ करते हुए बताया कि युद्ध का मूल कारण शारीरिक नहीं, बल्कि सचेत अंधत्व था।

प्रस्तुति में नेत्रपट को दो रूपों में उकेरा गया एक ओर कृष्ण में शरणागति से जाग्रत विवेक, तो दूसरी ओर अहंकार और हठ से जन्मा अंधत्व। चरम क्षण में कृष्ण के विराट रूप के साथ गीता उपदेश का भाव उभरा।

पूर्वरंग में छाऊ शैली पर आधारित उरुभंगम् और अंतरंग सभागार में मोहे पिया का मंचन हुआ। कलाकारों का स्वागत राहुल रस्तोगी ने किया।

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