जबलपुर: जिले में चल रही धान खरीदी के दौरान गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बावजूद प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच के बाद दो समितियों को ब्लैकलिस्ट, तीन को चेतावनी और एक वेयरहाउस को ब्लैकलिस्ट जरूर किया गया है, लेकिन कई अन्य समितियों और वेयरहाउसों में पाई गई भारी गड़बड़ियों पर कोई ठोस कार्रवाई न होना अधिकारियों की भूमिका को संदेह के घेरे में ला रहा है। जिला प्रशासन ने अभी तक दो समितियों को दो वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इन समितियों में नॉन एफएक्यू धान खरीदी, कम तौल, किसान कोड और नाम अंकित न होने जैसी गंभीर अनियमितताएं पाई गई थी। इसके अलावा तीन संस्थाओं के कर्मचारियों को केवल चेतावनी और गुरुवार को एक वेयरहाउस में घुन लगे गेहूं के साथ धान रखने को लेकर उसे ब्लैकलिस्ट किया गया है।
आरछा में कम तौल पर कोई कार्यवाही नहीं
पाटन तहसील अंतर्गत सेवा सहकारी समिति आरछा के धान खरीदी केंद्र पर कम तौल की गंभीर अनियमितता सामने आई। यहां किसान 40 किलो 600 ग्राम के बजाय 35 से 36 किलो धान की तौल कर रहा था। या तो वह किसान नहीं व्यापारी या बिचौलिया हो सकता है, जो बिना सर्वेयर के पास की हुई धान को धड़ल्ले से तौल करा रहा था, वह भी समिति द्वारा उपलब्ध कराए गए बारदाने में। मौजूद सर्वेयर का कहना था कि उसके द्वारा धान पास नहीं की है। दोबारा तौल में सभी बोरियां कम वजन की पाई गईं, जिसके बाद किसान आनन फानन में धान वापस लेकर चला गया। जिस पर केंद्र प्रभारी नीरज पटेल ने सफाई देते हुए यह कह दिया था कि वह किसान धान वापस लेकर चला गया है। इस मामले में केंद्र प्रभारी की भी किसान से मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों ने बताया कि केंद्र पर किसानों से तौल के नाम पर भी पैसों की मांग की जा रही है, साथ ही नॉन एफएक्यू धान भी आसानी से पास हो रही है। जिस पर प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है।
प्रशासनिक निष्पक्षता पर खड़े हो रहे सवाल
जहां एक ओर कुछ समितियों पर त्वरित कार्रवाई की गई, वहीं दूसरी ओर कई केंद्रों और वेयरहाउसों में स्पष्ट अनियमितताओं के बावजूद कठोर कदम न उठाया जाना प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। इससे धान खरीदी व्यवस्था में अधिकारियों और समितियों की संभावित मिलीभगत की चर्चा तेज हो गई है।
