महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
जब किसी के घर कोई मेहमान आ रहा है तो हमें बिना बुलाए वहां नहीं ठसना चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो अपमान होना स्वाभाविक सी बात है। कुछ ऐसा ही वाक्या महाकौशल के सिवनी में हाल ही में घटित हुआ, जब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को गुस्सा आया और उन्होंने जिला कांग्रेस के बड़े पद पर विराजमान एक कांग्रेसी नेता और कांग्रेसी विधायक से कहा कि आप दोनों के मोजे से बदबू आ रही है, आप यहां से उठो। बस फिर क्या था दोनों कांग्रेसी अपना मुंह लटकाकर नेता प्रतिपक्ष के कमरे से बाहर आ गए।
हुआ यूं कि सिवनी में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार एक अन्य जिले के कांग्रेस अध्यक्ष के रिश्तेदार के घर मिलने पहुंचे थे तभी अपने नंबर बढ़ाने के लिए दो कांग्रेसी नेता वहां पहुंच गए। लेकिन जब दोनों के मोजे से दुर्गन्ध आई तो उन्हें शर्मिंदा होकर बाहर आना पड़ा। बताया जा रहा है कि कांग्रेसी नेताओं के मोजों से बदबू आने में दोनों की कोई गलती नहीं थी क्योंकि दोनों ही नेता प्रतिपक्ष की अगवानी करने सुबह से लगे हुए थे और नए मोजे पहनना भूल गए थे। खबर तो ये भी है कि इन दोनों कांग्रेसियों को इस घटना से सबक मिल गया है और अब दोनों से बिना बुलाए कहीं भी जाने से स्पष्ट मना करने लगे हैं।
भाजपा जिला उपाध्यक्ष के इस्तीफे की गूंज भोपाल पहुंची
भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर को हाल ही में जिला उपाध्यक्ष बनी अंजू भार्गव ने अपने पद से इस्तीफा पत्र सौंपा उसके कुछ घंटे बाद ही शहर के ईसाई समाज ने आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया। अब ये खुशी तथाकथित धर्मांतरण विवाद से संबंधित रही या फिर जिला उपाध्यक्ष के पद को खाली कराकर अपने आदमी को सेट करने की, इसका राज अभी भी बरकरार है लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो एक पक्ष ने जिला उपाध्यक्ष पर इस्तीफे का दवाब बनाया जिससे उस सीट पर दूसरा कोई उनका आदमी सेट हो सके। भाजपा जिला उपाध्यक्ष द्वारा दिए गए इस्तीफे की गूंज भोपाल तक प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल तक पहुंची तो शहर में पार्टी के शीर्ष नेताओं को फटकार भी सुनने मिली ।
क्योंकि सभी जानकारों की सहमति से जिला उपाध्यक्ष पद पर अंजू भार्गव को चयनित किया गया था उसके बाद भी जो हालात पिछले कुछ दिनों पहले सामने आए उसने भाजपा की अंतर्कलह को सभी के सामने लाकर खड़ा कर दिया। दूसरी तरफ पार्टी के जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने भी दबी जुबान से कहा कि अंजू भार्गव ने इस्तीफा देकर बड़प्पन का काम किया है क्योंकि वे तथाकथित धर्मांतरण के आरोप को लेकर एक दृष्टिहीन महिला से हुए विवाद में पार्टी की छवि धूमिल नहीं करना चाहती थीं। ऐसे में शहर के राजनैतिक गलियारों में चर्चाएं जोरों पर हैं कि भाजपा की नगर उपाध्यक्ष ने इस्तीफा तो दे दिया है लेकिन उस इस्तीफे के पीछे पार्टी के कुछ नेताओं की प्रेशर पॉलिटिक्स की भूमिका ज्यादा रही।
राजनैतिक जानकारों की मानें तो भाजपा नगर उपाध्यक्ष की नियुक्ति के पहले स्थानीय संगठन के दिग्गजों से राय शुमारी भी की गई थी किसे कौन सा पद देना है जो आगामी चुनावों में संगठन को लाभ पहुंचाएगा। कई दिनों तक चली रायशुमारी के बाद जो लिस्ट फाइनल हुई उस पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अंत में मुहर लगाकर सूची सार्वजनिक कर दी थी। ऐसे में सवाल ये खड़े हो रहे हैं कि जब सब कुछ रायशुमारी से किया गया तो नियुक्ति के कुछ ही दिनों में इतना बड़ा बवाल कैसे खड़ा हो गया। चर्चाएं तो ये भी हैं कि जिला उपाध्यक्ष अंजू भार्गव की नियुक्ति से भाजपा के ही कई नेता, पदाधिकारी संतुष्ट नहीं थे और वे चाहते थे कि अंजू की जगह किसी दूसरे सक्रिय नेता को नगर उपाध्यक्ष की कमान सौंपी जाए।
कांग्रेसी पार्षद ने अपनी ही पार्टी के अभियान में लगाया पलीता
हाल ही में जबलपुर का सियासी माहौल उस वक्त गरमा गया जब विपक्ष यानि कांग्रेस के पार्षद वकील अंसारी ने सार्वजनिक तौर पर निगमायुक्त, महापौर व सत्ता पक्ष की पेयजल को लेकर प्रशंसा कर दी। एक ओर जहां कांग्रेस के स्थानीय दिग्गज नेताओं ने कांग्रेसी पार्षद की इस कारनामे पर चुप्पी साधी हुई है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के पार्षद ने ऐसा करके पार्टी की एकजुटता, अनुशासन को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। चर्चाएं जोरों पर थीं कि शहर में दूषित पानी को लेकर भाजपा को घेरने चली कांग्रेस ऐडी चोटी का जोर लगा रही है तो फिर कांग्रेस के ही पार्षद को इस अभियान में अड़ंगा नहीं डालना था। उधर भाजपाई खेमे में इस वाक्ये को चुटकुले की तरह लिया जा रहा है।
मामला भोंगाद्वार स्थित ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ा है जहां पानी की गुणवत्ता चैक करने कांग्रेसी पार्षद पहुंचे थे। जब इन्होनें नगर सत्ता की तारीफ की तो सत्ता पक्ष ने दावे से कह दिया कि दलगत राजनीति से ऊपर काम करने वाले कांग्रेसी पार्षद को हम सभी का सलाम है। वैसे तो मामले में कई जानकार ये भी कह रहे हैं कि कांग्रेसी पार्षद ने जमीनी हकीकत के आधार पर बयान दिया है और अगर किसी स्थान पर काम ठीक है तो उसे स्वीकार भी करना चाहिए। मतलब स्पष्ट है कि जबलपुर में गंदे नालों के बीच से गुजरी पाइप लाइन व दूषित पानी की समस्या को लेकर सियासत अपनी चरम सीमा पर है। विदित हो कि इंदौर के भागीरथपुरा में सामने आए जहरीला पानी कांड को लेकर कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ पूरे प्रदेश में मोर्चा खोल दिया है। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर कांग्रेस भाजपा और नगर निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस के इन आक्रामक तेवरों से भाजपा के अंदरखाने में हलचल मची हुई है।
