कोलकाता, (वार्ता) प्रसिद्ध रवींद्र संगीत गायक अर्घ्य सेन का बुधवार को कोलकाता स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे।
उनके निधन की पुष्टि उनके परिजनों और उनकी शिष्या इंद्राणी सेन ने की। अविवाहित अर्घ्य सेन को पश्चिम बंगाल में रवींद्र संगीत के स्वर्ण युग के अंतिम प्रतिनिधियों में से एक माना जाता था।
अर्घ्य सेन का जन्म 11 नवंबर 1935 को फरीदपुर (अब बांग्लादेश में) में हुआ था। उन्होंने कोलकाता में अशोकतरु बंदोपाध्याय और देबब्रत विश्वास जैसे दिग्गज संगीतकारों से रवींद्र संगीत की शिक्षा ली थी। वे टैगोर के गीतों की शुद्धता और उनके मूल भाव को बनाए रखने पर विशेष जोर देने के लिए जाने जाते थे। उनके लोकप्रिय गीतों में “नित्य, तोमार जे फूल फोटे फूल बोने” और “आमार माथा नतो कोरे” जैसे कई कालजयी गीत शामिल हैं।
रवींद्र संगीत के अलावा उन्होंने डी.एल. रॉय और रजनीकांत सेन के गीतों को भी अपनी आवाज दी, जिन्हें काफी सराहा गया। संगीत के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें 1997 में प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे बंगाल के सांस्कृतिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
