नयी दिल्ली, 14 जनवरी (वार्ता) लोहड़ी पर प्रसिद्ध शेफ हरपाल सिंह की राय में लोहड़ी एक त्योहार नहीं, बल्कि आग के अलाव के साथ गर्मजोशी, खुशियां और परंपराओं का उत्सव है। सर्द रात में गूंजती ढोल की थाप पर भांगड़ा के साथ आग की लपटें उठती हैं तो लोहड़ी अपने पूरे रंग में नजर आती है। लोहड़ी में सरसों का साग, मक्के की रोटी, तिल के लड्डू, गजक और मूंगफली की चिक्की इसकी पहचान है। वहीं शहरों लोहड़ी के घरों तक सिमटने के बावजूद त्योहार की सामाजिक भावना और पारिवारिक जुड़ाव आज भी कायम है।
प्रसिद्ध शेफ हरपाल सिंह ने इस मौके पर कहा कि अलाव की आग और ढोल की आवाज़ लोहड़ी की पहचान हैं। यह त्योहार परिवार के साथ बैठने, हंसी-मज़ाक और पारंपरिक स्वादों को साझा करने का अवसर देता है। आज शहरों में समारोह का स्वरूप बदला है, लेकिन सरसों का साग, मक्के की रोटी, तिल के लड्डू और रेवड़ी जैसे स्वाद आज भी लोहड़ी की आत्मा बने हुए हैं। इसके साथ ही आसान और झटपट तैयार होने वाले स्नैक्स ने जश्न को और सुविधाजनक बना दिया है।
गोदरेज यम्मीज़ की स्टेम 2.0 रिपोर्ट के अनुसार, इस लोहड़ी पर राजधानी दिल्ली के 48 प्रतिशत लोगों ने फ्रोज़न स्नैक्स का अधिक उपयोग किया। वहीं 59 प्रतिशत लोगों ने इन्हें मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों के साथ उत्सव का अहम हिस्सा माना। वहीं 75 प्रतिशत लोगों ने तंदूरी टिक्का और आलू टिक्की जैसे देसी फ्लेवर को प्राथमिकता दी।
