जबलपुर: सिविल लाइन निवासी जेल प्रहरी को दो जेल प्रहरियों समेत दो अन्य ने मंत्रियों से पहचान का दम दिखाकर गैस एजेंसी का लायसेंस दिलवाने के नाम पर 19 लाख रूपए ऐंठ लिए। मामले में सिविल लाइन पुलिस ने दो जेल प्रहरियों समेत अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।पुलिस सूत्रों के मुताबिक धीरेन्द्र द्विवेदी 36 वर्ष निवासी क्वार्टर न.8 जेल लाईन सिविल लाईन के जेल में जेल प्रहरी के पद पर पदस्थ थे जहां पर जितेन्द्र सिंह धाकड़ भी जेल प्रहरी के पद पर पदस्था था।
जिसने धीरेन्द्र को लालच देकर बोला था कि कब तक जेल की नौकरी करोंगे मैं तुम्हें अपने दोस्तों के माध्यम से गैस एजेंसी का लायसेंस देकर गैस ऐजेन्सी खुलवा देता दूंगा। जिसके लिये पैसे खर्च करने पड़ेंगे। मेरा दोस्त अनिल शर्मा है जो भूतपूर्व सैनिक है और केन्द्रीय जेल सतना में जेल प्रहरी के पद पर पदस्थ है। जिसको पेट्रोल पंप का लायसेंस मिल गया है उसकी मंत्रियों तक पहचान है। धीरेन्द्र बातोंं में आ गया पत्नी निशा द्विवेदी के नाम से गैस एजेंसी दिलाने की बात की। इसके बाद जीतेन्द्र धाकड के खाते में आनलाईन 1 लाख 95 हजार रूपये का ट्रान्जेक्शन किया और अपने दोस्तों के माध्यम से भी कराया।
मंत्रालय-सचिवालय तक पकड़ का दिया झांसा
कई दिनों बाद जब पीडि़त ने जितेन्द्र धाकड से बोला कि पैसे तो ले लिये हो एजेंसी कब खुलवा रहे हो जीतेन्द्र द्वारा अनिल का मोबाइल नंबर दिया और बात कराया। अनिल द्वारा बोला गया कि योगेश मिश्रा द्वारा पेट्रोल पंप का लायसेंस बनवाकर दिया गया है तुम्हारा गैस एजेन्सी का काम भी योगेश मिश्रा के माध्यम से ही होगा। उनकी मंत्रालय और सचिवालय में अच्छी पकड़ है जिसके बाद योगेश मिश्रा से कान्फ्रेन्स कॉल में बात करवाई। अनिल द्वारा योगेश मिश्रा से बात कराई तो कहा कि पत्नि के नाम पर गैस ऐजेन्सी का लायसेंस दिलवा देता हूं क्योंकि उज्जवला योजना के तहत महिलाओं को सब्सिडी मिलती है उसके हिसाब से 25 से 30 लाख रूपये में आपको एजेन्सी दिलवा दूंगा। जिसकी बात मानते हुये धीरेन्द्र के द्वारा योगेश मिश्रा और अनिल शर्मा को लायसेंस लेने के लिये बोल दिया।
12 पन्नों में कराये साइन, खातों में ट्रांसफर करवाई रकम
पीडि़त के मुताबिक अनिल ने योगेन्द्र को उसके घर फार्म लेकर भेजा था। योगेन्द्र ने कहा कि संपूर्ण पैसों का लेखा जोखा मां रखती है। आपके पैसे कही नहीं जायेंगे सुरक्षित रहेंगे एवं आपका काम जल्द ही हो जायेगा। 10 से 12 कागज के पन्नों पर उसके साइन भी कराये थे। योगेश मिश्रा के कहे अनुसार उनकी मां मूर्ति मिश्रा के दो खातों मेेंं विभिन्न तारीखों पर लगभग 18 से 19 लाख रूपये रिश्तेदारों से लेकर ऑनलाईन ट्रांसफर कर दिए थे।
दबाव बनाने पर फर्जी लायसेंस थमाया
19 लाख रूपए जाम करने के बाद भी जब लायसेंस नहीं मिला तो धीरेन्द्र ने दबाव बनाया। जिसके बाद योगेश मिश्रा द्वारा गैस ऐजेन्सी का लायसेंस नंबर एवं ऐजेन्सी का प्रमाण पत्र दिया गया परंतु कुछ समय पश्चात धीरेन्द्र ने विभिन्न गैस एजेन्सियों में जाकर पतासाजी करते हुए जांच की तो पता चला यह लायसेंस फर्जी है।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ है प्रकरण
इस फर्जीवाड़ी को लेकर धीरेन्द्र द्विवेदी की पत्नी निशा द्विवेदी ने न्यायालय में परिवाद दायर किया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर सिविल लाइन पुलिस ने आरोपित जेल प्रहरी जितेन्द्र सिंह धाकड, जेल प्रहरी अनिल शर्मा, अन्य योगेश मिश्रा पिता रामकृष्ण मिश्रा निवासी सतना, मूर्ति मिश्रा पति रामकृष्ण मिश्रा निवासी सतना के खिलाफ सिविल लाइन पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है।
