पदोन्नति नियमों को हाईकोर्ट में चुनौती, संयुक्त रूप से आज होगी सुनवाई

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर राज्य सरकार के पदोन्नति नियम 2025 के दो नियमों को असंवैधानिक बताया गया है। हाईकोर्ट ने इस याचिका को पूर्व में लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न करते हुए आज 13 जनवरी को सुनवाई निर्धारित की है।सिवनी निवासी ज्वाइंट डायरेक्टर सुरेश कुमरे की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर पक्ष रख रहे है। जिन्होंने बताया कि मप्र सरकार के पदोन्नति नियम के रूल-11 में कहा गया है कि प्रमोशन के लिए पहले आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों की सूची बनाई जाएगी।

उसके बाद अनारक्षित वर्ग की सूची बनेगी। इस नियम के तहत अनारक्षित में मेरिट के आधार पर आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार पदोन्नति नहीं पा सकेगा। मामले में दलील दी गई कि यह नियम सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि पहले अनारक्षित वर्ग की पदोन्नति हेतू डीपीसी की जाएगी। इसमें सभी वर्गों के मेरिटोरियस कर्मचारियों को अनुभव व योग्यता के मापदंड के आधार पर शामिल किया जाएगा।

राज्य शासन इसका पालन नहीं कर रही है। याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के 2018 के निर्देशानुसार केन्द्र सरकार व कुछ अन्य राज्यों ने डीपीसी में एक पद के विरुद्ध पांच गुना अभ्यर्थियों को शामिल करने की व्यवस्था दी है। जबकि मप्र के नियमों में केवल तीन गुना है। दरअसल याचिकाकर्ता श्री कुमरे ने पूर्व में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट में जाने की सलाह दी थी। याचिकाकर्ता ने 27 नवम्बर 25 को सरकार को अभ्यावेदन देकर उक्त नियमों में सुधार करने की मांग की थी। कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई

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