नई दिल्ली | 12 जनवरी, 2026: एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा सोलापुर की रैली में दिए गए “हिजाब पहनने वाली बेटी के प्रधानमंत्री बनने” के बयान पर आध्यात्मिक जगत में भारी आक्रोश है। जयपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इस बयान को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ और एक ‘दिवास्वप्न’ करार दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ हमने अब्दुल कलाम जैसे व्यक्तित्व को राष्ट्रपति बनाया है, लेकिन जहाँ तक महिला प्रधानमंत्री का सवाल है, भारत में साड़ी पहनने वाली महिला ही इस पद की शोभा बढ़ाएगी।
प्रसिद्ध कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने बुलंदशहर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ओवैसी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ओवैसी हिजाब का सपना देख रहे हैं, लेकिन एक दिन तिलकधारी और भगवाधारी न केवल भारत में, बल्कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी शासन करेंगे। ठाकुर ने सोमनाथ और अयोध्या के राम मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि सनातन परंपरा को कमजोर करने वाले खुद मिट गए। उन्होंने भविष्यवाणी की कि भविष्य में मथुरा में कृष्ण मंदिर और काशी विश्वनाथ मंदिर का भव्य स्वरूप पूरी दुनिया देखेगी।
इस पूरे विवाद की जड़ ओवैसी का वह बयान है जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी संविधान की तुलना भारतीय संविधान से करते हुए हिजाब वाली पीएम का दांव चला था। इसके जवाब में संतों ने हिंदू राष्ट्र की समयसीमा पर भी मंथन किया। देवकी नंदन ठाकुर ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 20-30 साल वाले बयान पर कहा कि सनातन राष्ट्र की रक्षा की मुहिम आज से ही शुरू करनी होगी। संतों का मानना है कि ऐसे बयान देश की एकता के लिए खतरा हैं और भारतीय संस्कृति के मूल स्वरूप को बदलने की कोशिश मात्र हैं।

