
ब्यावरा/राजगढ़। एक दशक के पूर्व तक राजगढ़ का पहाड़ी क्षेत्र बंजर सा नजर आता था किंतु मोहनपुरा डेम निर्माण से पानी की उपलब्धता के चलते आज बंजर नजर आने वाले पहाड़ी क्षेत्र ने हरियाली की चादर ओढ़ ली है. राजगढ़ के पहाड़ी क्षेत्र में फसलें लहलहा रही है. साल दर साल फसल का रकबा बढ़ रहा है, जो कि कृषि क्षेत्र के लिए एक अच्छी खबर है. इस बार राजगढ़ के आसपास पहाड़ी क्षेत्र सहित जिले में गेहूं का रकबा बढक़र अनुमानित 4 लाख 12 हजार हैक्टर पर जा पहुंचा है, जबकि पूर्व के तीन सालों एवं गत वर्ष गेहूं का रकबा इससे कम था.
विदित है कि ब्यावरा-राजगढ़ मार्ग पर राजगढ़ के आसपास आठ से दस किमी में काफी पहाड़ी क्षेत्र है, एक दशक के पूर्व तक यहां ख्ेाती का रकबा काफी कम होकर पहाड़ी क्षेत्र बंजर सा नजर आता था. किंतु मोहनपुरा डेम निर्माण के बाद डेम में पानी की पर्याप्त उपलब्धता ने मानो इस पहाड़ी क्षेत्र की तस्वीर ही बदल दी. आज राजगढ़ के आसपास का पहाड़ी क्षेत्र फसलो एवं हरियाली से आच्छादित नजर आता है.
चना, मसूर का रकबा घटा
कृषि विभाग के अनुसार पानी की पर्याप्त उपलब्धता के चलते जहां गेहूं फसल की अधिकाधिक बोवनी की जा रही है, वहीं चना एवं मसूर फसल का रकबा घटा है. इस बार जिले में चना का रकबा अनुमानित 12 हजार हैक्टर पर रहा है.
उद्यानिकी फसलों का रकबा भी बढ़ा
राजगढ़ के पहाड़ी वाले क्षेत्र में जहां गेहूं व अन्य फसलों का रकबा बढ़ा है वहीं उद्यानिकी फसलों का रकबा भी बढ़ा है. औषद्यीय फसल चीयासीड सहित अन्य उद्यानिकी फसल, सब्जी की पैदावार काफी बढ़ी है.
पानी के अभाव में नहीं ले पा रहे थे फसल
राजगढ़ के आसपास 8 से 10 किमी के एरिया में बंजर भूमि पर आज से एक दशक पूर्व तक पानी की उपलब्धता नहीं होने से चाहकर भी फसल की पैदावार नहीं हो पाती थी. किंतु अब डेम से पानी की उपलब्धता होने के चलते ग्रामीणजन फसल की पैदावार करने लगे है, इससे जहां पहाड़ी बंजर भूमि हरिभरी नजर आती है वहीं एक अच्छी खासी आय भी प्राप्त होने लगी है. पहले ग्रामीण पानी के अभाव में साल में एक ही फसल कर पाते थे अब उसी भूमि पर दो फसल सुविधाजनक रुप से कर रहे है.
मोहनपुरा डेम से पानी की उपलब्धता के चलते गेहूं फसल का रकबा साल दर साल बढ़ रहा है. इस बार भी गेहूं फसल का रकबा बढ़ा है. पहाड़ी क्षेत्र में भी फसल आज लहलहा रही है.
सचिन जैन
जिला उप संचालक
कृषि विभाग राजगढ़
