मुंबई | पिछले साल मशहूर अभिनेत्री जरीन खान के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार को लेकर सोशल मीडिया पर उपजे विवाद पर उनके बेटे और अभिनेता जायद खान ने पहली बार अपनी खामोशी तोड़ी है। एक हालिया इंटरव्यू में भावुक होते हुए जायद ने बताया कि उनकी मां की अंतिम इच्छा थी कि उनके पार्थिव शरीर को अग्नि दी जाए और अस्थियों को पवित्र नदी में विसर्जित किया जाए ताकि उन्हें ‘मुक्ति’ मिल सके। जायद ने स्पष्ट किया कि एक बेटे के रूप में उनके लिए धर्म से कहीं बढ़कर मां के उन आखिरी शब्दों का सम्मान करना था, जो उन्होंने एक बार नदी किनारे बैठकर कहे थे।
जायद खान ने आलोचना करने वालों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उनका परिवार धर्म को एक बेहद निजी विषय मानता है और उनके लिए ‘इंसानियत’ सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि उनके घर में विभिन्न धर्मों और पृष्ठभूमियों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं, जहाँ हर परंपरा का सम्मान किया जाता है। ट्रोलिंग के सवाल पर अभिनेता ने कहा कि उन्हें लोगों की बातों से फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि समाज की सोच को बदलने में समय लगता है। जायद के अनुसार, जरीन खान ने अपनी पूरी जिंदगी अपनी शर्तों पर जी थी और उनका अंतिम सफर भी उनकी व्यक्तिगत पसंद के अनुरूप ही संपन्न हुआ।
60 के दशक की जानी-मानी अभिनेत्री जरीन खान का निधन 7 नवंबर को 81 वर्ष की आयु में हुआ था। देव आनंद जैसे दिग्गजों के साथ ‘तेरे घर के सामने’ जैसी फिल्मों में काम करने वाली जरीन ने 1966 में अभिनेता संजय खान से विवाह किया था। पारसी मूल की होने और मुस्लिम परिवार का हिस्सा होने के बावजूद, उन्होंने हिंदू परंपराओं को चुना जो उनकी उदारवादी सोच का परिचायक था। उनके परिवार में सुजैन खान, फराह और सिमोन सहित चार बच्चे हैं, जिन्होंने मिलकर अपनी मां की इस अनूठी विदाई का समर्थन किया और रूढ़िवादी बेड़ियों को तोड़कर एक मिसाल पेश की।

