तेहरान, 10 जनवरी (वार्ता) ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने कहा है कि वह अब अपने वतन वापसी की तैयारी कर रहे हैं। श्री पहलवी ने शनिवार को सोशल मीडिया पर जारी एक संदेश में यह बात कही। उन्होंने कहा, “मैं भी अपने वतन लौटने की तैयारी कर रहा हूँ ताकि मैं अपने लोगों के साथ, महान देश ईरान के साथ रह सकूँ, हमारी राष्ट्रीय क्रांति जीतेगी। मुझे विश्वास है कि वह दिन बहुत करीब है।” उन्होंने सरकारी कर्मचारियों, खासकर तेल के कामकाज में लगे कर्मियों से भी हड़ताल पर जाने की अपील की। उन्होंने लिखा, “इस बारे में, मैं इकॉनमी के खास सेक्टर, खासकर ट्रांसपोर्टेशन, और तेल, गैस, और एनर्जी के वर्कर्स और कर्मचारियों से देश भर में हड़ताल शुरू करने की अपील करता हूं।” ईरान के शाह पहलवी, देश में धार्मिक क्रांति का बिगुल बजने से पहले देश के प्रमुख थे पर इस्लामिक क्रांति के बाद उन्होंने भागकर अमेरिका की शरण ली थी। क्राउन प्रिंस उन्हीं के बेटे हैं और आज भी ईरान में शाह के परिवार को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
श्री पहलवी ने यह भी कहा कि लोग प्रतीकों के साथ सड़कों पर आएं और सार्वजनिक जगहों पर कब्जा कर लें। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी से यह भी कहता हूं कि आज और कल, शनिवार और रविवार (10 और 11 जनवरी) को, देश के झंडों, तस्वीरों और निशानों के साथ सड़कों पर आएं और सार्वजनिक जगहों पर कब्ज़ा कर लें। हमारा मकसद अब सिर्फ़ सड़कों पर आना नहीं है; लक्ष्य शहर के सेंटर्स को जीतने और बचाने की तैयारी करना है।” उन्होंने अपनी अपील में ईरान के इटरनल गार्ड के युवाओं और नेशनल कोऑपरेशन प्लेटफॉर्म में शामिल हुए सभी हथियारबंद और सुरक्षा बलों से मदद का आग्रह किया।
इस बीच, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन 13वें दिन में प्रवेश कर गए हैं। विदेशों में रहने वाले ईरानियों ने भी प्रदर्शनकारियों ने अपने अपने देशों में रैलियां निकाल पर देशवासियों का समर्थन किया। यूरोप के देशों जर्मनी (बर्लिन), फ्रांस (पेरिस) और यूनाइटेड किंगडम (लंदन) में बड़े पैमाने पर रैलियां निकाली गयी। अमेरिका के वाशिंगटन, न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स जैसे शहरों में हजारों ईरानी-अमेरिकियों ने मार्च निकाला। कनाडा के टोरंटो और वैंकूवर में भी प्रदर्शनकारियों ने एकजुटता दिखाते हुए ईरानी अधिकारियों के प्रदर्शनों के दमन की निंदा की। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी और मेलबर्न में भी प्रदर्शन हुए, जहाँ लोगों ने “आजादी” और “मानवाधिकार” के पक्ष में पोस्टर लहराए।

