उज्जैन: अनादि-अनंत कालों के काल महाकाल की पावन नगरी उज्जैन एक बार फिर धर्म, संस्कृति, इतिहास और आस्था के विराट संगम की साक्षी बनने जा रही है. मकर संक्रांति के शुभ पर्व से 14 जनवरी को प्रारंभ होकर 18 जनवरी तक चलने वाले पांच दिवसीय ‘महाकाल उत्सव’ का भव्य आयोजन महाकाल लोक कॉरिडोर में किया जा रहा है. इस ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महोत्सव का शुभारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे.
यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की परंपरा, काल-गणना की विरासत, शैव दर्शन और उज्जैन की सनातन चेतना का जीवंत प्रकटीकरण होगा। महाकाल लोक के दिव्य प्रांगण में होने वाला यह महोत्सव देश-दुनिया को यह संदेश देगा कि उज्जैन केवल एक नगर नहीं, बल्कि सृष्टि के आरंभ से काल-चक्र का केंद्र रहा है.
देशभर की कलाओं से सजेगा महाकाल लोक
महाकाल उत्सव के अंतर्गत देश के विभिन्न राज्यों से आमंत्रित कलाकार धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राचीन नृत्य-नाट्य प्रस्तुतियां देंगे. शास्त्रीय नृत्य, लोककलाएं, जनजातीय समूहों की विशिष्ट प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक झांकियां इस उत्सव को बहुरंगी स्वरूप प्रदान करेंगी.
विशेष आकर्षण के रूप में कला यात्राएं निकाली जाएंगी, जिनमें भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराएं सजीव रूप में दर्शन देंगी.
काल-गणना का केंद्र उज्जैन
नवभारत से चर्चा में उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा कि उज्जैन की महिमा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और ऐतिहासिक भी है. उज्जैन तहसील के डोंगला स्थित प्राचीन वैधशाला (ऑब्जर्वेटरी) इस बात का प्रमाण है कि प्राचीन काल से ही उज्जैन काल-गणना और खगोलीय अध्ययन का केंद्र रहा है. ऐसे में महाकाल उत्सव का आयोजन उज्जैन के वैभव को देश-दुनिया में और अधिक प्रतिष्ठित करेगा. कलेक्टर ने बताया कि प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन हेतु उज्जैन आते हैं. महाकाल उत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को यहां की सांस्कृतिक गतिविधियों, योजनाओं और सनातन परंपराओं से भी परिचित कराया जाएगा.
सोमनाथ आयोजन की झलक भी
महाकाल उत्सव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोमनाथ मंदिर में किए गए धार्मिक आयोजनों की भी विशेष झलक प्रस्तुत की जाएगी, जिससे शैव परंपरा की अखंड कड़ी देश के कोने-कोने तक पहुंचे।
विश्व में अद्वितीय है महाकाल मंदिर का अपना बैंड
उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर का स्वयं का निजी बैंड इस उत्सव का विशेष आकर्षण रहेगा. यह विश्व का एकमात्र मंदिर है, जिसका अपना पर्सनल बैंड है. पांचों दिन इस बैंड की भव्य प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर करेंगी.
वर्षभर उत्सवों की नगरी है उज्जैन
वीर भारत न्यास के सचिव श्री राम तिवारी ने कहा कि उज्जैन वर्षभर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से जीवंत रहता है. विक्रम उत्सव, सावन में बाबा महाकाल की सवारी, कार्तिक मेला, कालिदास समारोह जैसे आयोजन यहां की पहचान हैं. महाकाल उत्सव इन सबसे पृथक है, क्योंकि इसमें बाबा महाकाल से जुड़ी प्राचीन परंपराओं, शौर्य, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का विशेष समावेश किया गया है, ताकि देश-दुनिया के श्रद्धालु सीधे महाकाल की चेतना से जुड़ सकें.
सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज की परंपरा का विस्तार
वीर भारत न्यास के सचिव श्री राम तिवारी ने बताया कि महाकाल उत्सव का आयोजन उसी क्षेत्र में हो रहा है, जहां कभी सम्राट विक्रमादित्य की बैठक और सिंहासन बत्तीसी रही. सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज जैसे महापुरुषों ने भी महाकाल की आराधना और उत्सव किए थे. आज उसी परंपरा को महाकाल लोक कॉरिडोर में आगे बढ़ाया जा रहा है।
प्रशासन और संस्थाओं ने की पूरी तैयारी
उज्जैन सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, वीर भारत न्यास के सचिव श्री राम तिवारी, महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक सहित जिला प्रशासन, वीर भारत न्यास, महाकाल मंदिर प्रबंध समिति एवं धार्मिक-सांस्कृतिक मंत्रालय ने आयोजन की समस्त तैयारियां पूर्ण कर ली हैं. 14 से 18 जनवरी तक कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध कवि दिनेश दिग्गज द्वारा किया जाएगा.
