महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने जबलपुर में भाजपा के सभी वरिष्ठ नेताओं, सांसद व विधायकों के प्रति गहरी नाराजगी जताई तो स्थानीय भाजपा खेमे में खलबली मच गई। वजह..जबलपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान जबलपुर जिले से 2 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम कटना। इस कटौती से उपजे राजनीतिक संकट और भविष्य के चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अलर्ट मोड पर आया और बिगड़ी स्थिति को संभालने, एस आई आर की पूरी कमान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के हाथों सौंप दी।
जबलपुर से लेकर भोपाल तक चर्चाएं हैं कि शीर्ष नेतृत्व खुद मान रहा है कि जबलपुर जिले के विधायकों और सांसद ने पुनरीक्षण काम में रूचि नहीं दिखाई जिस कारण मतदाताओं के नाम कटने की स्थिति उत्पन्न हुई। राकेश सिंह अब जबलपुर में बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक एसआइआर के कार्यों की समीक्षा करेंगे। वह स्वयं बीएलए (बूथ स्तरीय प्रतिनिधियों) और जिला प्रभारियों के साथ संवाद कर यह सुनिश्चित करेंगे कि 10 जनवरी तक मतदाता सूची की त्रुटियों को दूर कर लिया जाए।
खबर तो ये भी है कि स्थानीय भाजपा संगठन को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं ये दो लाख से अधिक मतदाताओं के जो नाम मतदाता सूची से हटे हैं वह कहीं आगामी लोकसभा और स्थानीय चुनावों के समीकरण न बिगाड़ दें। इसे देखते हुए बीएलए को निर्देश दिए गए हैं कि वह अनुपस्थित, स्थानांतरित और मृतक सूची का अपने स्तर पर फिर से भौतिक सत्यापन करें। यदि किसी सक्रिय मतदाता का नाम तकनीकी कारणों या लापरवाही से हटा दिया गया है, तो उसे तत्काल वापस जुड़वाया जाए।
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने जो निर्देश दिए हैं कि उससे तो साफ है कि कहां, किससे चूक, गलती हुई उसका हिसाब तो बाद में होगा, फिलहाल प्राथमिकता सूची को सुधारने की रखी गई है। पार्टी ने जबलपुर में डैमेज कंट्रोल के लिए जिले के प्रत्येक बूथ पर कम से कम 50 नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की रणनीति तय कर ली है। इस कार्य के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा को सबसे आगे रखा गया है।
जेडीए अध्यक्ष बनने दिल्ली तक लगा रहे ऐड़ी चोटी का जोर
जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की कुर्सी के लिए भाजपा में अपनों के ही बीच घमासान नजर अभी से आने लगा है। साल 2025 पूरी तरह भाजपा की बैठकों की भेंट चढ़ गया और अब सभी की नजर जनवरी पर टिकीं हुईं हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश के निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में कुर्सी व पद की चाह रखने वाले भाजपा के नेताओं के भाग्य के ताले खुल जाएंगे। किसकी किस्मत का ताला खुलता है ये तो आने वाला समय बताएगा लेकिन राजनैतिक गलियारों के बीच में जो खबर निकलकर आ रही है उससे तो साफ हो गया है कि जबलपुर विकास प्राधिकरण की कुर्सी पाने की होड़ में जिले के पूर्व मंत्रियों का एक गुट बहुत सक्रिय हो चुका है जो कि सत्ता से बाहर होने के बाद भी अब अपनी अपनी राजनीतिक वापसी के लिए जेडीए को सीढ़ी बनाना चाह रहा है।
इसके लिए ये गुट भोपाल से दिल्ली तक भागादौड़ी में जुटा है, दूसरी तरफ संगठन के पुराने निष्ठावान नेता भी इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार भाजपा के दिल्ली के आलाकमान ने परफॉरमेंस और उम्र का इस बार निगम मंडलों की नियुक्ति पर एक ऐसा कड़ा फिल्टर लगाया है, जिसमें कई पुराने सूरमाओं के नाम कटने का अनुमान भी लगाया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस बार नियुक्तियों की सूची सिर्फ भोपाल से तय नहीं होगी। दिलचस्प बात यह है कि कई दावेदारों ने अब धार्मिक अनुष्ठानों का भी सहारा लेना शुरू कर दिया है।
भाजपा के भीतर यह सुगबुगाहट तेज है कि यदि इस बार भी सूची अटकी, तो संगठन के भीतर असंतोष को संभालना मुश्किल होगा। तमाम कयासों के बीच ये तो फिलहाल स्पष्ट नजर आ रहा है कि भाजपा नेताओं की पहली पसंद जबलपुर विकास प्राधिकरण ही है। क्योंकि जेडीए की कमान हाथ में होने से शहर के विकास और स्थानीय राजनीति पर उनकी पकड़ मजबूत रहेगी। यही कारण है कि पूर्व मंत्री और संगठन के कद्दावर जेडीए अध्यक्ष की कुर्सी के लिए ज्यादा ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।
भाजपा नेत्री के वायरल वीडियो ने भोपाल तक मचाया हड़कंप
यह बात नई नहीं है कि भाजपा के अनेक कद्दावर सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी करते हुए पार्टी की अनुशासनात्मक छवि को धूमिल कर रहे हैं। उनकी यही बयानबाजी संगठन के लिए मुसीबत का सबब बनते जा रही है, दूसरी ओर विपक्ष भी चटखारे लेकर राजनैतिक गलियारों में भाजपा के अनुशासन का मजाक बनाते नजर आ रहा है। कथित भाजपा महिला नेत्री के वायरल वीडियो के बाद भोपाल के शीर्ष नेतृत्व ने जबलपुर के भाजपा के सभी बड़े नेताओं को फोन लगाकर पूछा कि ये महिला कौन है..ताजा मामला जबलपुर में उस वक्त उजागर हुआ जब मुख्यमंत्री के जबलपुर प्रवास पर उनके काफिले को भाजपा की महिला नेत्री शिखा शर्मा ने रोकने का प्रयास किया जब काफिला नहीं रूका तो महिला नेत्री ने वीडियो में जो दावा किया वो काफी चौंकाने वाला रहा।
महिला नेत्री शिखा शर्मा वायरल वीडियो में एक अन्य महिला से ये कह रहीं हैं कि मैंने 3 मर्डर किए हैं, राजेश तिवारी से पूछना मैंने कैसे मर्डर किए हैं, मैं जब चाहूं किसी का भी मर्डर करके आ जाती हूं। जिस साहब का नाम महिला नेत्री ने वीडियो में लिया है वो पुलिस अधिकारी रह चुके हैं। उधर भाजपा जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे ने दो टूक कहा कि जो वीडियो में महिला बात कह रही है उसका भाजपा से कोई लेना देना नहीं है और वह पार्टी की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रही है।
ये बात जब महिला नेत्री तक पहुंची तो उसने स्पष्ट कहा कि जिस भाजपा के लिए मैंने कई सालों तक सेवाएं दीं वही संगठन अब मुझे पहचानने से इंकार कर रहा है। भाजपा महिला नेत्री के इस वायरल वीडियो ने जबलपुर सहित भोपाल के भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के खेमे तक हड़कंप मचा दिया है। कुछ दिनों तक मामला शहर में गरमाया रहा और फिर बीते मंगलवार को शिखा शर्मा ने एसपी को लिखित शिकायत देकर बताया कि जो वीडियो उसका वायरल हुआ है वो फेक है और उसे बदनाम करने की साजिश की जा रही है। शिकायत में एसपी से महिला नेत्री ने फरियाद की है कि उसे बदनाम करने वाले और वीडियो को एडिट कर वायरल करने वालों पर कार्रवाई की जाए।
