जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में तीन साल के प्रोबेशन काल में तीन श्रेणी में निर्धारित न्यूनतम वेतन में कटौती किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि कर्मचारियों को प्रोबेशन काल में शत प्रतिशत वेतन दिया जाये। वेतन से काटी गयी राशि उन्हें वापस की जाये।
याचिकाकर्ता स्वाति जैन व आदित्य मिश्रा सहित अन्य कर्मचारियों की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने द्वारा दिसम्बर 2019 को एक सर्कुलर जारी किया गया था। सर्कुलर के अनुसार याचिकाकर्ताओं को प्रोबेशन काल के दौरान पहले, दूसरे और तीसरे साल में न्यूनतम वेतनमान का 70 प्रतिशत, 80 प्रतिशत और 90 प्रतिशत वेतन दिया जायेगा। चौथे साल से उन्हें षत प्रतिषत वेतन दिया जायेगा। सकुर्लर के बाद कर्मचारियों के वेतन से उक्त राशि की कटौती वेतन से प्रारंभ का दी गयी थी।
याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने साल 2023 में हाईकोर्ट ने वेतन से राशि वसूले पर रोक लगा दी। याचिका की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि इंदौर खंडपीठ ने इंदौर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के मामले में अपने आदेश में कहा है कि तीन साल के प्रोबेशन पीरियड के दौरान, जब इन कर्मचारियों से रेगुलर काम लिया जा रहा था, तीन स्लैब में कम सैलरी देने के पीछे कोई लॉजिक नहीं है। समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत के तहत न्यूनतम वेतनमान पाने का हकदार है। कर्मचारी ने काम किया है, इसलिए वे बिना किसी कटौती के अपने पद की पूरी सैलरी पाने के हकदार हैं। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद कर्मचारियों के हित में उक्त आदेश जारी किये।
