
उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय युवा उत्सव ‘अभ्युदय’ का शुभारंभ गुरुवार को सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों के साथ हुआ। प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने संगीत, नृत्य, चित्रकला और ज्ञान आधारित प्रतियोगिताओं में अपनी रचनात्मकता और प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। पूरे परिसर में कला, संस्कृति और युवा ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, कुलसचिव डॉ. अनिल शर्मा एवं विद्यार्थी कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. एसके मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस उत्सव के पहले दिन विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शास्त्रीय संगीत की मधुर स्वर लहरियों से लेकर भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित चित्रकला तक, हर आयोजन ने दर्शकों को आकर्षित किया।
स्वामी विवेकानंद अभियांत्रिकी संस्थान में आयोजित एकल शास्त्रीय गायन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने राग भैरवी, बैरागी भैरव, बागेश्वरी, मुल्तानी और यमन की सशक्त प्रस्तुतियां दीं। प्रत्येक प्रतिभागी को 15 मिनट का समय दिया गया। कलाकारों ने उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा एकाग्र वातावरण उपलब्ध कराया गया है। संगीत प्रेमियों की खासी उपस्थिति रही।
महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ में आयोजित स्पॉट पेंटिंग प्रतियोगिता में 12 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता का विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ रहा। बरकतउल्ला विश्व विद्यालय, जीवाजी विश्व विद्यालय, राजा मानसिंह विश्व विद्यालय, देवी अहिल्या विश्व विद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों के छात्रों ने ढाई घंटे में अपनी कलात्मक कल्पनाओं को कैनवास पर उतारा। निर्णायकों ने विषय की गहराई, रंग संयोजन और प्रस्तुति के आधार पर मूल्यांकन किया।
मुक्ताकाशी मंच पर एकल शास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता में भाव, लय और मुद्राओं की मनोहारी प्रस्तुतियां हुईं। वहीं स्वर्ण जयंती सभागृह में लोक एवं आदिवासी समूह नृत्य प्रतियोगिता ने विशेष आकर्षण पैदा किया। विधि अध्ययनशाला में आयोजित प्रश्नमंच प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने ज्ञान और तर्क क्षमता का परिचय दिया।
लोक नृत्यों में झलकी मध्यप्रदेश की विविधता
मुक्ताकाशी मंच पर समूह लोक नृत्य प्रतियोगिता में बुंदेलखंडी राई, बुंदेली बधाई, बरेदी, दिवली, गोंड जनजातीय नृत्य, लभरिया, गिद्दा-भांगड़ा और होली नृत्य जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की लोक संस्कृतियां जीवंत हो उठीं। प्रत्येक दल को 8 से 10 मिनट का समय दिया गया। स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित एकल शास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता में कथक, भरतनाट्यम सहित विभिन्न शैलियों की प्रस्तुतियां हुईं। कथक विशारद सिद्धि साटले, द्रौपदी चीरहरण पर आधारित श्वेता कुशवाह की प्रस्तुति और भरतनाट्यम में माता सीता के चरित्र का भावपूर्ण चित्रण विशेष रूप से सराहा गया। दृष्टिबाधित कलाकार कर्णेश यादव की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। पहले दिन की प्रतियोगिताओं ने यह स्पष्ट किया कि ‘अभ्युदय’ न केवल युवाओं की प्रतिभा को मंच दे रहा है, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम भी बन रहा है।
