सतना: केंद्र अथवा राज्य स्तर पर पुलिसिंग को लेकर चाहे जितने भी सुधार कर लिए जाएं लेकिन उससे कुछ पुलिसकर्मियों मानसिकता नहीं बदल पाती. जिला चिकित्सालय में चिकित्सक के चेंबर में धड़धड़ाते हुए घुस जाने, अभद्रता करने और खुले आम धमकाने की शिकायत पर पुलिस ने भले ही कोई संज्ञान नहीं लिया. लेकिन उलटे चिकित्सक के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करने में जरा सी भी देर नहीं लगाई. इतना ही नहीं इस रवैऐ के चलते पुलिस को न्यायालय में खासी फटकार भी सुनने को मिली. लेकिन इसके बावजूद भी कोई कार्रवाई होती न देख चिकित्सक लामबंद हो गए और प्रताडि़त चिकित्सक के समर्थन में आवाज उठानी शुरु कर दी.
पंडित अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना में पदस्थ सहायक प्रोफसर डॉॅ अभिनव शर्मा को इन दिनों जबरदस्त प्रताडऩा झेलनी पड़ रही है. कोतवाली पुलिस ने उनके विरुद्ध 3 महीने पहले प्रकरण दर्ज कर लिया था. जिसके चलते उन्हें स्वयं को निर्दोष साबित करने के लिए न्यायालय में हाजिरी लगानी पड़ रही है. डॉ. शर्मा के साथ जारी इस प्रताडऩा की जानकारी जब मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों को हुई तो वे सभी लामबंद हो गए.
इसी कड़ी में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक सोमवार को जिला चिकित्सालय परिसर में एकत्र हो गए. चिकित्सकों द्वारा सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए सहायक प्राध्यापक डॉ. शर्मा को न्याय दिलाने की मांग की गई. इसी कड़ी में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों द्वारा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नाम संबोधित ज्ञापन भी सौंपा. इतना ही नहीं बल्कि इस मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के बीच आक्रोश भी पनपने लगा है. चिकित्सकों के अनुसार इस संबंध में ठोस कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.
क्या है मामला..?
मामल लगभग 3 महीने पुराना है जब डॉ. अभिनव शर्मा जिला चिकित्सालय की आर्थो ओपीडी में बैठकर मरीजों को देख रहे थे. इसी दौरान कंदैली निवासी पुष्पराज सिंह बघेल और माधुरी सिंह लाइन तोड़ते व मरीजों को धक्का देते हुए चेंबर में घुस आए. चेंंबर में जबरदस्ती बैठते हुए उन्होंने कहा कि पहले उन्हें देखा जाए. काफी समझाने के बावजूद भी जब दोनों नहीं माने तो हारकर डॉ. शर्मा को उन्हें देखने पड़ा. मरीज माधुरी के घुटने और कूल्हें में दर्द को देखते हुए डॉ. शर्मा ने एक्सरे कराने की सलाह दी. लेकिन इसके बावजूद भी पुष्पराज ने दर्जन भर गुण्डे वहां बुला लिए गाली-गलौच करते हुए जान से मारने की धमकी देने लगे. उन्होंने धमकाते हुए कहा कि बाहर निकलते ही उनका एक्सीडेंट करवा दिया जाएगा. इस दौरान 2 अन्य चिकित्सक भी चेंबर में मौजूद थे.
शर्म भी नहीं आती इन्हें
इस घटना से आहत डॉ. शर्मा द्वारा 11 अक्टूबर को शिकायती आवेदन कोतवाली पुलिस को सौंपा गया था. लेकिन कोतवाली पुलिस ने डॉ. शर्मा की शिकायत पर कोई संज्ञान नहीं लिया. लेकिन कोतवाली पुलिस की बेशर्मी उस वक्त सामने आई जब पुष्पराज सिंह और माधुरी की शिकायत पर डॉ. शर्मा के विरुद्ध प्रकरण दर्ज करने में जरा सी भी देर नहीं लगाई गई. चालान प्रस्तुत करने के बाद पुलिसकर्मियों द्वारा डॉ. शर्मा को कोर्ट में प्रस्तुत होने का दबाव बनाया जाने लगा.
व्यवस्था से डरे सहमे डॉ. शर्मा कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत भी हो गए. लेकिन मामले पर गौर करते ही न्यायालय द्वारा कोतवाली पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि शर्म आनी चाहिए. बिना किसी विवेचना के इस तरह की छोटी बात में उलझाकर चिकित्सक को परेशान करना कतई उचित नहीं है. लेकिन इतना सब होने के बावजूद भी कोतवाली पुलिस के कानों में अब तक जूं नहीं रेंगी और चिकित्सक की शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं की गई. जिसे देखते हुए अब मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने लामबंद होकर मोर्चा संभालना शुरु कर दिया है.
