इंदौर:नगर निगम के नए आयुक्त ने कल देर रात पदभार ग्रहण कर लिया. नए निगम आयुक्त के सामने कई चुनौतियां है और सबसे पहले भागीरथपुरा में हालत पर काबू पाना है. उससे बड़ी चुनौती जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करना है.कल रात 12 बजे क्षितिज सिंघल ने निगम आयुक्त का कार्यभार ग्रहण कर लिया. नगर निगम में पिछले तीन सालों में चार कमिश्नर बदल गए.
इसका सबसे बड़ा कारण जनप्रतिनिधियों और निगम कमिश्नर के साथ खींचतान चलती रही. पार्षद और महापौर की शहर के समस्याओं, विकास कार्यों के टेंडर के साथ काम की प्राथमिकता तय नहीं होना सबसे बड़ा कारण रहा है.इससे बड़ा कारण अपने चहेते अधिकारियों को विभाग का कार्यभार देना है. कई विभागों का दायित्व होने से किसी भी विभाग के काम समय पर नहीं हो रहे थे.
फिर चाहे नर्मदा, ड्रेनेज, सड़क, बिजली, लीज, जन कार्य टेंडर की फाइल हो या अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति की फाइल हो, सब टेबलों पर धूल खाती है. अधिकारी भी जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता को समझ नहीं पा रहे थे. यही कारण है कि निगम आयुक्त रहे प्रतिभा पाल, हिमानी सिंह,शिवम वर्मा और दिलीप कुमार यादव और मंत्री, महापौर एवं पार्षदो के बीच अप्रत्यक्ष रुप से खींचतान हुई.
इसमें सिर्फ शिवम वर्मा ही थोड़ा सामंजस्य स्थापित कर पाए थे और उनके कार्यकाल में अपर आयुक्त काम पर थोड़ा ध्यान देकर दायित्व निभा रहे थे. वर्मा के जाते ही दिलीप यादव एवं उनकी टीम से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव की कार्य को लेकर अदरूनी अनबन चलती रही. परिणाम स्वरूप भागीरथपुरा में गंदा पानी सप्लाई का विस्फोट हो गया!सबसे बड़ी और पहली चुनौती शहर में गंदे पानी की शिकायत है, जो शहर के 70 प्रतिशत इलाके में मौजूद है. दूसरी बड़ी चुनौती पार्षदों और महापौर के साथ शहर में विकास कार्य को लेकर प्राथमिकता और समन्वय बैठाना है.
