
जबलपुर। विदेश में अपराध होने के कारण भारत में दर्ज की गई एफआईआर को निरस्त किये जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा है कि पुलिस एफआईआर दर्ज कर प्रारंभिक जांच कर रही है और प्रकरण में चार्जशीट दायर नहीं की गयी है। ट्रायल कोर्ट ने उस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है तो ऐसी स्थिति में एफआईआर को निरस्त नही किया जा सकता है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिका को खारिज कर दिया।
जापान निवासी वैभव जैन तथा राजस्थान निवासी उनके पिता पुनीत व माता निकिता जैन की तरफ उक्त याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि वैभव का विवाह भोपाल निवासी अनावेदिका से जनवरी 2023 में जयपुर राजस्थान में हुआ था। वैभव तथा उसकी अनावेदिका पत्नी जापान में नौकरी करते थे। विवाह के बाद वैभव अपने माता-पिता को जापान ले गया था। जापान में अनावेदिका अपने पति के माता-पिता के साथ विवाद करती थी। वह जापान छोडकर भोपाल स्थित अपने मायके आकर रहने लगी।
आवेदिका पत्नी ने उसके तथा माता-पिता के खिलाफ दहेज के लिए प्रताड़ित करने,मारपीट करने सहित अन्य आरोप लगाते हुए महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी है। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि अपराध विदेश में घटित हुआ है। इसलिए धारा 188 के तहत केन्द्र सरकार की अनुमति के बिना कोई जांच नहीं की जा सकती है। अनावेदिका की तरफ से तर्क दिया गया कि शुरुआती जांच में केन्द्र सरकार की मंजूरी आवश्यक नही है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि रिकॉर्ड के अनुसार पीड़ित का आरोप है कि अपराध जापान के साथ भारत में भी किया गया है। आरोपों के अनुसार भारत लौटने के बाद भी पति के द्वारा उसे प्रताड़ित किया गया। पीड़ित की शिकायत पर अपराध सिर्फ दर्ज किया गया है। धारा 188 की मंजूरी संज्ञेय अपराध तथा ट्रायर स्टेज में लागू होती है। पुलिस जांच कर रही है और चार्जशीट दायर नही की गयी है। हाईकोर्ट ने उक्त आदेश के साथ याचिका को खारिज कर दिया।
