इस्लामिक कट्टरपंथ, भीड़तंत्र को बढ़ावा दे रहे यूनुस: अवामी लीग

ढाका, 31 दिसंबर (वार्ता) अवामी लीग ने बंगलादेश में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कट्टरपंथियों को सशक्त बनाकर और सांप्रदायिक सद्भाव की भावना को खत्म करके देश में भीड़तंत्र एवं इस्लामिक कट्टरपंथ का रास्ता साफ किया है।

पार्टी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के गिरने के बाद भीड़ हिंसा में लगभग सात गुना बढ़ोतरी हुई है। पार्टी ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि भीड़ हिंसा में निशाना बनाये गये लोगों में राजनीतिक कार्यकर्ता और नेता, आपराधिक कृत्यों के आरोपी (अक्सर बिना सबूत के) और धार्मिक अल्पसंख्यक शामिल थे।

पार्टी ने कहा कि हिंसा की यह लहर को पहले के आकलन से कहीं ज़्यादा है। यह व्यवस्थित और जानबूझकर तैयार की गयी लहर है। अवामी लीग ने कहा कि यह सिर्फ व्यक्तियों पर हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि कहीं ज़्यादा व्यापक है। इसमें भीड़ जमीनी स्तर पर संस्थानों पर हमला कर रही है। इस भीड़ को सूक्ष्म राजनीतिक समर्थन के माध्यम से कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार मिला हुआ था।

बयान में कहा गया, “ राजनीतिक और धार्मिक प्रतिष्ठानों को बार-बार निशाना बनाया गया। बंगबंधु मेमोरियल म्यूजियम पर दो बार हमला किया गया, जो हिंसा की प्रतीकात्मक प्रकृति को रेखांकित करता है। देश भर में सूफी दरगाहों पर भी ‘तौहीदी जनता’ के बैनर तले काम करने वाली इस्लामी भीड़ ने लगातार हमले किये।”

बयान में देश के दो राष्ट्रीय अखबारों प्रोथोम आलो और डेली स्टार के दफ्तरों पर हुए हमलों का ज़िक्र करते हुए कहा गया कि इस तोड़फोड़ के बाद ही किसी तरह की आधिकारिक कानूनी कार्रवाई की गयी। पार्टी ने कहा कि भीड़ हिंसा के संबंध में यह सवाल खड़ा होता है कि भीड़ कई घंटों तक “ बिना किसी हस्तक्षेप के संपत्ति लूटने, जलाने और नष्ट करने में कैसे सक्षम थी? सुरक्षा बल कहां थे, और प्रतिक्रिया तंत्र इतनी बुरी तरह विफल क्यों हो गये? ”

पार्टी ने कहा कि पूरे साल राज्य की प्रतिक्रिया की चयनात्मक प्रकृति भी उतनी ही स्पष्ट थी। जब भीड़ हिंसा के पीड़ितों को अवामी लीग से जुड़ा हुआ माना गया, तो सरकार चुप रही। पार्टी ने दावा किया कि अपराधियों के लिए कानूनी परिणाम न के बराबर थे। बयान में कहा गया, “ साल के अंत तक संदेश स्पष्ट था। भीड़ की शक्ति ने कानून के शासन की जगह ले ली थी। सामूहिक हिंसा का सामान्य होना, चुनिंदा कार्रवाई, और हमलावरों को राजनीतिक संरक्षण ने बंगलादेश को शासन के एक गहरे संकट में डाल दिया है। यह न सिर्फ़ सार्वजनिक सुरक्षा, बल्कि न्याय, बहुलवाद और लोकतांत्रिक जवाबदेही की बुनियाद को भी खतरा है। ”

 

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