मुंबई, 29 दिसंबर (वार्ता) मलेशिया में आयोजित जना नायकन ऑडियो लॉन्च के दौरान निर्देशक एटली ने थलपति विजय के लिए एक बेहद भावुक और दिल छू लेने वाला भाषण दिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। नेशनल स्टेडियम बुकिट जलिल में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम थलपति थिरुविझा के नाम से हुआ, जो विजय के करियर के एक ऐतिहासिक पड़ाव का प्रतीक बना। कहा जा रहा है कि जना नायकन थलपति विजय की आख़िरी फ़िल्म हो सकती है, जिससे यह शाम विरासत, कृतज्ञता और भावनाओं से भर गई।
अपने भाषण में एटली ने अपने शुरुआती सफ़र को याद करते हुए बताया कि कैसे एक असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में उन्हें थलपति विजय से प्रोत्साहन मिला था। एटली ने विजय की विनम्रता को रेखांकित करते हुए कहा, “जब मैं असिस्टेंट डायरेक्टर था, अपने आख़िरी दिन उन्होंने मुझे बुलाया और कहा, ‘तुम बहुत अच्छा काम कर रहे हो। अगर तुम्हारे पास कोई कहानी है, तो आकर मुझे सुनाओ।’ उस समय उन्होंने 50 फ़िल्में पूरी कर ली थीं। कोई बड़ा स्टार ऐसा नहीं करता।” अपनी इस खूबसूरत कहानी को बयाँ करने के बाद एटली ने प्यार से विजय को “मेरे भाई, मेरे थलपति” कहकर संबोधित किया, जिसने वहाँ उपस्थित उनके सभी फैंस को भावुक कर दिया। एटली ने आगे अपने रिश्ते को ज़िंदगी के एक खूबसूरत रूपक के ज़रिये समझाया, जो दर्शकों के दिलों तक उतर गया। उन्होंने कहा, “ज़िंदगी में हम तीन तरह के लोगों से मिलते हैं, पत्ते, जो आते-जाते रहते हैं; टहनियाँ, जो तूफ़ान में टूट जाती हैं; और जड़ें, जो कभी साथ नहीं छोड़तीं। मेरे विजय भाई वही जड़ हैं।”
इस भावुक पल पर स्टेडियम तालियों से गूंज उठा। एटली–विजय की जोड़ी ने थेरी (2016), मेर्सल (2017) और बिगिल (2019) जैसी तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी हिट फ़िल्में दी हैं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक साझेदारी को भी मज़बूत किया।
हालांकि इस शाम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब एटली भावनाओं में बहते हुए मंच पर दौड़कर विजय से लिपट गए। विजय ने भी उन्हें गर्मजोशी से गले लगाया और कंधे पर प्यार से किस किया, जिसे देखकर दर्शकों ने ज़ोरदार तालियों से उनका स्वागत किया। यह पल अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है और दोनों के भाई जैसे रिश्ते की खूबसूरत झलक पेश कर रहा है। अनिरुद्ध रविचंदर के संगीत और भव्य लाइव ऑर्केस्ट्रा के साथ ‘जना नायकन’ ऑडियो लॉन्च एक यादगार शाम बन गया, जो सिनेमा, सहयोग और उस दोस्ती को समर्पित थी, जिसने तमिल सिनेमा पर एक अमिट छाप छोड़ी है।

