नई दिल्ली। 26 दिसंबर, 2025। अक्सर लोन की किस्त समय पर न चुका पाने की स्थिति में बैंक या एनबीएफसी (NBFC) के रिकवरी एजेंट ग्राहकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि कर्जदार होने के बावजूद व्यक्ति की निजता और गरिमा का अधिकार सुरक्षित है। नियमों के अनुसार, किसी भी रिकवरी एजेंट के पास आपके घर में जबरन घुसने का अधिकार नहीं है। एजेंट के पास बैंक द्वारा जारी वैध आईडी कार्ड और अथॉराइजेशन लेटर होना अनिवार्य है। यदि कोई एजेंट अपनी पहचान साबित नहीं कर पाता, तो ग्राहक को उससे बात करने से इनकार करने का पूरा कानूनी अधिकार है।
बैंक रिकवरी के लिए संपर्क करने का एक निश्चित समय निर्धारित किया गया है। आरबीआई की गाइडलाइंस के मुताबिक, कोई भी एजेंट केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही ग्राहक को फोन कर सकता है या घर जा सकता है। देर रात या तड़के फोन कर परेशान करना नियमों का सीधा उल्लंघन है। साथ ही, एजेंट को ग्राहक के साथ हमेशा मर्यादित और सम्मानजनक व्यवहार करना होगा। वह आपके दोस्तों, पड़ोसियों या रिश्तेदारों के सामने आपके लोन की जानकारी साझा नहीं कर सकता और न ही आपको सामाजिक रूप से अपमानित करने की कोशिश कर सकता है।
यदि कोई रिकवरी एजेंट अभद्रता या धमकी देता है, तो ग्राहक उसकी बातचीत रिकॉर्ड कर सकते हैं और सबूत के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। सबसे पहले इसकी शिकायत संबंधित बैंक के नोडल अधिकारी से की जानी चाहिए। यदि बैंक 30 दिनों के भीतर संतोषजनक समाधान नहीं देता है, तो ग्राहक सीधे ‘आरबीआई ओम्बड्समैन’ (लोकपाल) पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आरबीआई ऐसे मामलों में बैंकों पर न केवल भारी जुर्माना लगाता है, बल्कि दोषी एजेंसी का लाइसेंस भी रद्द कर सकता है, जिससे ग्राहकों को तुरंत कानूनी राहत मिलती है।

