
सांची। नगर को सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने और बिजली की बचत के उद्देश्य से सांची को देश की पहली सोलर सिटी का दर्जा दिया गया था. लेकिन आज वही सांची यह दर्जा केवल कागजों तक सीमित होते देख रही है. सौर ऊर्जा के नाम पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद नगर आज भी अंधेरे, अव्यवस्था और बदहाल व्यवस्थाओं से जूझ रहा है.
जानकारी के अनुसार, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए आनन-फानन में नगर भर में खंभे गाड़कर सोलर लाइटें लगाई गईं. शुरुआत में कुछ समय तक रोशनी जरूर दिखाई दी, लेकिन जल्द ही इन योजनाओं की वास्तविकता सामने आने लगी. नगर में लगाए गए कई सोलर खंभे अब गायब हो चुके हैं, जबकि अनेक स्थानों पर सोलर प्लेटें टूट-फूट कर बेकार हालत में पड़ी हैं.
नगर के प्रमुख चौराहों पर स्थापित हाईमास्ट सोलर लाइटें भी अब केवल दिखावे की वस्तु बनकर रह गई हैं. रखरखाव के अभाव में ये लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं, जिससे पूरा नगर एक बार फिर अंधेरे की गिरफ्त में आ गया है. नतीजतन बिजली पर निर्भरता बढ़ गई है और बिजली कटौती की समस्या ने आमजन की परेशानियां और बढ़ा दी हैं.
सड़कों के किनारे पड़े ध्वस्त सोलर खंभे और टूटी प्लेटें आज भी सरकारी लापरवाही और योजनाओं की विफलता की कहानी बयां कर रही हैं. यही स्थिति सौर ऊर्जा से संचालित प्याऊ की भी है, जिन पर लाखों रुपये खर्च होने का दावा किया गया था. गर्मी के मौसम में भी इन प्याऊ से गर्म पानी निकलता रहा, जिससे लोगों को राहत के बजाय परेशानी झेलनी पड़ी
हैरानी की बात यह है कि निर्माण के बाद से आज तक इनकी नियमित सफाई तक नहीं कराई गई. अनदेखी के चलते अब इन पर घास और कचरा जमा हो चुका है.
नगरवासियों में इस पूरे मामले को लेकर गहरा आक्रोश है। सौर ऊर्जा के नाम पर खर्च की गई भारी-भरकम राशि की बर्बादी पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित एजेंसियां अब तक जवाबदेही से बचती नजर आ रही हैं.
क्या कहते हैं एसडीएम
इस संबंध में एसडीएम रायसेन मनीष शर्मा ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में लाया गया है. शीघ्र ही निरीक्षण कर संबंधित लोगों से चर्चा की जाएगी और आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी.
