
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बुधवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इसे मतदाता अधिकारों पर सीधा हमला बताया। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य कमलेश्वर पटेल ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि एसआईआर के प्रथम चरण के बाद 23 दिसंबर 2025 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में कई गंभीर खामियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्यापन के दौरान 5 करोड़ 31 लाख से अधिक मतदाताओं को गलत तरीके से “नॉट मैपिंग” श्रेणी में डाल दिया गया, जबकि उनकी अलग सूची न तो मतदान केंद्रों पर चस्पा की गई और न ही वेबसाइट पर अपलोड की गई। उन्होंने यह भी कहा कि एएसडीआर सूची की मुद्रित प्रतियां न तो बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को दी गईं और न ही राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई गईं, जिससे हटाए गए मतदाताओं की पहचान संभव नहीं हो पा रही है।
वर्मा ने एसआईआर के दौरान मतदान केंद्रों में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए और कहा कि कई नए बूथों पर बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त नहीं हैं, जिससे दावा–आपत्ति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस द्वारा उठाई गई आपत्तियों का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ तो पार्टी संवैधानिक और न्यायिक रास्ता अपनाएगी।
इस अवसर पर सीडब्ल्यूसी सदस्य कमलेश्वर पटेल ने एसआईआर के दौरान अत्यधिक कार्य दबाव के कारण कर्मचारियों की हुई मौतों पर शोक व्यक्त करते हुए इसके लिए सरकार और निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि प्रदेशभर में 42.74 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो लोकतंत्र पर गंभीर हमला है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता जे.पी. धनोपिया ने निर्वाचन आयोग से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने और दावा–आपत्ति के निराकरण में कांग्रेस के बीएलए को निष्पक्ष रूप से शामिल करने की मांग की।
