मुंबई क्लाइमेट वीक: भारत का नागरिक-नेतृत्व वाला जलवायु आंदोलन

शिशिर जोशी, संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रोजेक्ट मुंबई और मुंबई क्लाइमेट वीक

हमने 2018 में प्रोजेक्ट मुंबई की शुरुआत एक साधारण सोच के साथ की थी, जब नागरिक एक साथ आते हैं, तो बदलाव निश्चित होता है । समुद्र तटों के स्वच्छता अभियान और मानसिक स्वास्थ्य उपक्रमों से लेकर समावेशी खेल गतिविधियों और सामुदायिक देखभाल कार्यक्रमों तक, हमने देखा है कि लोगों की सामूहिक शक्ति से कैसे असंभव लगने वाले बदलाव भी संभव हो जाते हैं ।

अब हम इसी भावना को मुंबई क्लाइमेट वीक (MCW) के माध्यम से वैश्विक स्तर पर ले जा रहे हैं । 17 से 19 फरवरी 2026 के बीच मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में इसका आयोजन किया जाएगा । मुंबई क्लाइमेट वीक केवल जलवायु परिवर्तन पर चर्चा तक सीमित रहने वाला मंच नहीं होगा । यह नागरिकों की पहल से ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों में जलवायु परिवर्तन की तीव्रता कम करने के लिए किए जाने वाले उपायों के सार्वभौमिक कार्यान्वयन हेतु एक पोषक वातावरण तैयार करने वाला मंच बनेगा । इसका मुख्य उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष कार्रवाई (Action) पर जोर देना है ।

नागरिक-नेतृत्व (Citizen-Led) ही क्यों?

जलवायु परिवर्तन की तीव्रता कम करने की कार्यवाही अब तक मुख्य रूप से सरकारों, बहुपक्षीय संस्थाओं और कॉर्पोरेट बोर्डरूम के दायरे में रही है । नीतिगत ढांचा (Policy frameworks) महत्वपूर्ण है, लेकिन जिन समुदायों पर जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है, वे अक्सर इस ढांचे से बाहर रह जाते हैं । मुंबई जैसे शहर में यह समस्या स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जहाँ प्रदूषण, बाढ़ और बुनियादी ढांचे की समस्याओं के साथ संघर्ष जारी है । प्रभावी उपाय हमेशा एसी सभागारों में पैदा नहीं होते । वे बस्तियों से, जमीनी स्तर के प्रयोगशील उद्यमियों द्वारा, बेचैन कर देने वाले सवाल पूछने वाले छात्रों से और धरातल पर काम करने वाले स्वयंसेवी संस्थाओं से उभरते हैं ।

नागरिक-नेतृत्व वाले इस मॉडल का अर्थ है:

• नीति (Policy) सीधे लोगों तक पहुँचती है ।
• नवाचार (Innovation) वास्तविक दुनिया में उपयोग में लाए जाते हैं ।
• जलवायु परिवर्तन के परिणामों को झेलने वाला समाज केवल ऊपर से थोपे गए समाधानों को स्वीकार करने वाला नहीं, बल्कि सक्षमता (Resilience) के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनता है ।

प्रोजेक्ट मुंबई के माध्यम से हमने शहर की सबसे गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए नागरिकों, सरकार और निजी संस्थाओं के बीच हमेशा एक ‘सेतु’ के रूप में काम किया है । हमारा मॉडल भागीदारीपूर्ण शासन (Participatory Governance), पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित है । मुंबई क्लाइमेट वीक इसी विचार का विस्तार है, जो मुंबई, भारत और ग्लोबल साउथ की जलवायु समस्याओं का सामना करने के लिए एक वैश्विक मंच बनेगा ।

जलवायु कार्रवाई का लोकतंत्रीकरण: हब-एंड-स्पोक मॉडल

मुंबई क्लाइमेट वीक की एक विशेष विशेषता इसका ‘हब-एंड-स्पोक’ (Hub-and-Spoke) मॉडल है । यह केवल एक व्यावहारिक निर्णय नहीं है, बल्कि सहभागिता बढ़ाने और जलवायु कार्रवाई में सामान्य से अधिक लोगों को शामिल करने के लिए जानबूझकर बनाया गया एक ढांचा है ।

• हब (Hub): जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में होने वाला तीन दिवसीय कार्यक्रम नेतृत्व चर्चाओं, विषय-आधारित पैनल और नवाचार प्रदर्शनियों का केंद्र होगा । यहाँ नीति निर्माता, सीईओ, जलवायु वैज्ञानिक और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल एकत्र होंगे । उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है और हमें 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है !
• स्पोक्स (Spokes): मुख्य केंद्र के साथ-साथ पूरी मुंबई में फैले उप-कार्यक्रमों का एक जाल होगा, जो मिलकर एक शहर-व्यापी मंच बनाएंगे । यहाँ केंद्र में बनी योजनाओं का वास्तविक समुदायों में ‘स्ट्रेस-टेस्टिंग’ किया जाएगा ।

इसके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
• यूनिसेफ (UNICEF) और युवाह (YuWaah) द्वारा आयोजित कैंपस रोड-शो ।
• नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) में कला प्रदर्शनी (Art Installations) ।
• फिल्म प्रदर्शन और टिकाऊ खान-पान (Sustainable Diets) के फूड फेस्टिवल ।
• क्लाइमेट-टेक समाधानों के लिए हैकथॉन ।
• नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा आयोजित क्लाइमेट इनोवेशन चैलेंज ।
• बस्तियों में सामुदायिक कार्यशालाएँ ।
इस संरचना के कारण चर्चाएँ केवल वातानुकूलित सभागारों तक सीमित न रहकर कॉलेजों, सांस्कृतिक केंद्रों और सीधे आम नागरिकों तक पहुँचेंगी ।

तीन विषय, एक मिशन!
मुंबई क्लाइमेट वीक तीन मुख्य विषयों पर केंद्रित है: खाद्य प्रणाली (Food Systems), ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और शहरी लचीलापन (Urban Resilience) । ये तीनों क्षेत्र ग्लोबल साउथ के विकास के एजेंडे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं ।

इनोवेशन चैलेंज: कल्पनाओं को हकीकत में बदलना
मुंबई क्लाइमेट वीक का ‘इनोवेशन चैलेंज’ इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) पार्टनर के रूप में शामिल है ।
• यह बहु-स्तरीय कार्यक्रम भारत और प्रतिभागी देशों के स्टार्टअप्स, छात्रों, शोधकर्ताओं और पर्यावरण उद्यमियों को अपने प्रभावी विचारों के परीक्षण और प्रदर्शन के लिए आमंत्रित करता है ।
• इसमें एक ‘युवा ट्रैक’ (Youth Track) भी शामिल है, जिसका नेतृत्व यूनिसेफ की ‘युवाह’ टीम कर रही है ।
यह चुनौती केवल अच्छे विचारों को खोजने के लिए नहीं है, बल्कि विचार के जन्म से लेकर उसके कार्यान्वयन तक एक विश्वसनीय मार्ग तैयार करने का प्रयास है । तीसरे दिन, अंतिम विजेताओं के लिए “इन्वेस्टर स्पीड-सीडिंग फोरम” (Investor Speed-Seeding Forum) आयोजित किया जाएगा, जहाँ वे सीधे निवेशकों से संवाद कर सकेंगे । उद्देश्य यह है कि आशाजनक स्टार्टअप्स और पायलट प्रोजेक्ट्स को बड़े पैमाने पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके । हमें ऐसे समाधानों की जरूरत है जो मुंबई, टियर-2 शहरों, ग्रामीण भारत और पूरे ग्लोबल साउथ में काम कर सकें ।

वैश्विक मंच पर भारत का क्षण
वर्षों से जलवायु परिवर्तन की चर्चाओं पर पश्चिमी देशों का प्रभुत्व रहा है और ग्लोबल साउथ को अक्सर इसमें गौण स्थान दिया गया है । मुंबई क्लाइमेट वीक इस वास्तविकता को बदलने की शुरुआत है । यह न्यूयॉर्क या लंदन की नकल करने के लिए नहीं है । यह दिखाने का प्रयास है कि मुंबई, भारत और ग्लोबल साउथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में क्या कर रहे हैं और इसे कैसे गति दी जा सकती है ।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बारे में कहा है: “जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में संवाद से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई की ओर मुड़ने का समय आ गया है। मुंबई क्लाइमेट वीक एक ऐसा बेहतरीन उपक्रम है जो नागरिकों, व्यवसायों और संस्थाओं को एक साथ लाता है। हम इसे सही मायने में एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाने के लिए वैश्विक समुदाय तक पहुँचेंगे—जहाँ आशा, कार्रवाई से मिलती है (Hope Meets Action)।”

भारत के शहर, यहाँ के युवा और यहाँ के स्टार्टअप्स तैयार हैं। मुंबई क्लाइमेट वीक उनका अपना मंच है और आज पूरी दुनिया की नजरें हम पर हैं ।

 

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