उपाध्यक्ष के रेस में प्रियंका गांधी, सचिन पायलट समेत कई पूर्व मुख्यमंत्रियों का नाम शामिल
प्रवेश कुमार मिश्र
नई दिल्ली:कांग्रेस पार्टी आने वाले समय में न सिर्फ सांगठनिक ढांचे में व्यापक बदलाव करते हुए राष्ट्रीय संगठन को चार जोन में बांटकर उसका प्रभार चार उपाध्यक्षों को देने की रणनीति बना रही है बल्कि पार्टी अपनी चुनावी रणनीति में भीआमूलचूल परिवर्तन करने की योजना बना रही है.सूत्रों की मानें तो पार्टी के अंदर अपने सांगठनिक ढांचे में समय के साथ बदलाव करने का प्रस्ताव वर्षो से विचाराधीन है लेकिन किसी न किसी वजह से उसको कार्ययोजना में शामिल नहीं किया जा सका है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पार्टी को मिली करारी चुनावी शिकस्त के कारण पार्टी के अंदर मौजूद एक बड़ा समूह पार्टी की सांगठनिक व्यवस्था में बदलाव करने के लिए आंतरिक दबाव बना रहा है.
सूत्र बता रहे हैं कि दूसरे दलों में जिस तरह से समय के साथ सांगठनिक जिम्मेदारी में अपेक्षाकृत नेताओं को आगे लाने की प्रक्रिया आरंभ हुई है उससे प्रेरित होकर कांग्रेसी रणनीतिकारों ने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के नीचे चार उपाध्यक्षों की नियुक्ति करने की योजना बनाई है. संगठन को चार जोन में बांटकर एक-एक जोन की जिम्मेदारी एक -एक उपाध्यक्षों को सौंपी जाएगी. प्रत्येक उपाध्यक्ष के जिम्मे छह से आठ राज्य होंगे. उसके बाद हरेक प्रदेश की निगरानी के लिए महासचिव या स्वतंत्र प्रभार वाले प्रभारी और हरेक प्रदेश प्रभारियों के साथ चार से छह सचिव व संयुक्त सचिव की नियुक्ति की जानी है. सूत्र बता रहे हैं कि इस व्यवस्था के तहत अध्यक्ष की ताकत कमजोर नहीं किया जाएगा बल्कि इसके तहत संगठन को और धारदार व जवाबदेह बनाने का प्रयास किया जाएगा. चर्चा है कि सांगठनिक अनुभव प्राप्त कर चुके अपेक्षाकृत युवा नेताओं को उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी रणनीतिकार युवा मतदाताओं के बीच सार्थक संदेश देते हुए उन्हें पुनः कांग्रेसी विचारधारा के साथ जोडने का प्रयास करेंगे.
सूत्रों की मानें तो पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, पृथ्वीराज चौहान, भूपेन्द्र हुड्डा, भूपेश बघेल तथा वी नारायण सामी के साथ-साथ पार्टी महासचिव सचिन पायलट, पूर्व पार्टी महासचिव तारिक अनवर जैसे वरिष्ठ नेताओं के नाम में से ही किसी चार को पार्टी उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है.
सूत्रों की मानें तो बहुस्तरीय चुनावों में लगातार पराजय सामना कर रही पार्टी ने अपने परंपरागत रणनीति में सुधारात्मक बदलाव करने की तैयारी आरंभ कर दी है. पार्टी रणनीतिकारों द्वारा संगठन सृजन के माध्यम से जहां एक तरफ जमीनी स्तर तक मजबूत संगठन तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर चुनावी लडाई में बेहतर परिणाम पाने के उदेश्य से उम्मीदवारों के चयन प्रक्रिया और प्रचार नीति में व्यापक बदलाव किया जाएगा. उक्त रणनीति को अमलीजामा पहनाने के लिए चुनावी रणनीतिकारों व विश्लेषकों की टीम से बहुस्तरीय जानकारी इकट्ठा कर पार्टी रणनीतिकार अपने स्तर से समीक्षा कर इसे पार्टी की कार्यशैली में शामिल करने की रणनीति बना रहे हैं
