ब्यावरा: बीते दो दिनों से जिले में कड़ाके की ठंड का जोर जारी है. न्यूनतम तापमान 4 डिग्री के आसपास बना हुआ है. कड़ाके की ठंड ने कंपकपा दिया है. देर शाम होते ही कोहरा छाने लग रहा है, जो सुबह तक बना रहता है.गौरतलब है कि दिसम्बर माह का दूसरा पखवाड़ा शुरु होते ही ठंड का कहर बढ़ गया है. 17 दिसम्बर को जिले का न्यूनतम तापमान 4.4 तथा 18 दिसम्बर को 4.6 डिग्री रहा. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले समय में न्यूनतम तापमान में और गिरावट के साथ शीत लहर का प्रकोप बढऩे के संकेत दिए है.
गत वर्ष और लुढक गया था तापमान
इस बार अभी तक का न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री रहा है. आने वाले दिनों में तापमान और लुढकने के संकेत मौसम विभाग ने दिए है. गौरतलब है कि गत वर्ष 2024 में 15 दिसम्बर को जिले का न्यूनतम तापमान 3.8 डिग्री पर जा पहुंचा था.
ठंड से सावधानी जरुरी
ठंड का प्रकोप बढ़ते ही आमजन के समक्ष परेशानी शुरु हो गई है, विशेषकर बीमार, बुजुर्ग एवं छोटे बच्चों के लिए ठंड का प्रकोप दिक्कतों भरा साबित हो रहा है. इनको ठंड से बचाव हेतु चिकित्सकों द्वारा विशेष तौर पर सावधानी रखते हुए सतर्कता बरतने हेतु कहा गया है. जिला महामारी नियंत्रक डा. महेन्द्रपाल सिंह के अनुसार न्यूनतम तापमान में कमी से ठंड की तीव्रता बढ़ी है, ऐसे में गंभीर बीमारियों के मरीज, बच्चे, बुजुर्गो का विशेेष ध्यान रखते ठंड से बचाव बहुत जरुरी है. अधिक समय तक ठंड के प्रकोप से फ्लू, बुखार, सर्दी-जुकाम आदि बिमारियों की संभावना बढ़ जाती है, आवश्यक होने पर ही ठंड में बाहर निकले.
फसलों के लिए वरदान बनी कड़ाके की ठंड
कड़ाके की ठंड ने भले ही लोगों के सामने परेशानी खड़ी कर दी है किंतु फसलों के लिए ठंड का प्रकोप वरदान साबित हो रहा है. पौधा काफी बेहतर स्थिति में होकर फसलों में कीट आदि अन्य परेशानी दूर होने लगी है. ठंड के कारण पौधो की ग्रोथ काफी बेहतर हो रही है. कृषि जानकारों के अनुसार फसलों के लिए कड़ाके की ठंड का आना बहुत ही लाभदायक होता है. इससे पौधे बेहतर प्रगति करते हुए अच्छा उत्पादन होता है. कीट व अन्य कीट व्याधा ठंड से दूर हो जाती है. सिंचाई में भी इससे राहत मिलती है. साथ ही दिन में धूप का निकलना भी जरुरी होता है फसल के पौधो को जितनी ठंड की आवश्यकता होती है उतनी ही धूप भी फसल के लिए जरुरी होती है.
अलाव बने रहे सहारा
कड़ाके की ठंड के साथ शीत लहर, कोहरे ने जनजीवन प्रभवित कर रखा है. बदले मौसम के चलते सुबह एवं रात में सडक़ो पर आवाजाही कम होने लगी है. आवश्यक कार्य से ही लोग सुबह एवं रात्रि में बाहर निकल रहे है. ठंड से राहत पाने घर, चौराहों, सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलते हुए नजर आ रहे है, यह अलाव ठंड से राहत दिलाने में बड़ा सहारा बने हुए है.
कोहरा, धुंध से होता है नुकसान
जहां जोर की ठंड फसल के लिए फायदेमंद होती है तो वहीं कोहरा, धुंध फसलों के लिए नुकसानदायक होता है. लगातार कई दिनों तक कोहरा, धुंध होने से फसलों की ग्रोथ रुक जाती है. ऐसे में खेतों में डाले जाने वाले उर्वरक दवा का असर नहीं होता है.
कड़ाके की ठंड फसलों के लिए वरदान से कम नहीं है. गेहूं, चना व अन्य फसलों के लिए वर्तमान में पड़ रही ठंड लाभप्रद साबित हो रही है.
एन.एस. हरियाले
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विभाग ब्यावरा
