जबलपुर: ग्वारीघाट स्थित सीजीएसटी कार्यालय में सीबीआई जबलपुर ने चार लाख की रिश्वत लेते दो सीजीएसटी अधिकारियों को गिरफ्तार करने के बाद गुरुवार दोपहर न्यायालय लेकर पहुंचीऔर न्यायालय से आरोपियों की रिमांड की डिमांड की गई। जिसके बाद कोर्ट ने दोनों को 22 दिसम्बर तक सीबीआई को आरोपियों की रिमांड दे दी है। अब दोनों से सीबीआई सघन पूछताछ कर रही है। मामले में बड़ा नेटवर्क खुल सकता है। सूत्र बताते है कि रिश्वतखोर अधिकारियों ने सूची बनाई हुई थी। जिसके जरिए वे पहले जांच करते थे और फिर रिकवरी, टैक्स पर कारवाई का डर दिखाकर रिश्वत लेते थे।
मामले की विस्तृत जांच जारी है। जिसमेें बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।जानकारी के मुताबिक विवेक त्रिपाठी ने सीबीआई जबलपुर में शिकायत कर बताया कि वे सतपुरा इंफ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड जबलपुर के निदेशक हैं और जबलपुर में उनके चार होटल हैं। वर्ष 2018-19 में उनके एक होटल, सुकून सिटी व्यू का ओयो कंपनी के साथ संबद्धता थी। ओयो कंपनी से संबंधित जीएसटी का मामला जबलपुर के सीजीएसटी कार्यालय में लंबित है और इस संबंध में उनके होटल को करों के बकाया के लिए एक कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।
सीजीएसटी विभाग ने उनसे उनके होटल, सुकून सिटी व्यू जबलपुर के दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा था और उन्होंने नोटिस के लिखित उत्तर के माध्यम से सुकून सिटी व्यू के सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड बैंक स्टेटमेंट के साथ सीजीएसटी विभाग को पहले ही जमा कर दिए हैं। हालांकि, जबलपुर के सीजीएसटी इंस्पेक्टर सचिन खरे ने होटल के खिलाफ मामला बंद करने और अपने पक्ष में आदेश देने के बदले में 4,00,000 रुपये की अवैध रिश्वत की मांग की उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से अपना काम करवाने का आश्वासन भी दिया।
रिश्वत की मांग के सत्यापन के दौरान, शिकायतकर्ता ने जबलपुर स्थित सीजीएसटी कार्यालय में निरीक्षक सचिन खरे और अधीक्षक बर्मन से बातचीत की। सीए हर्षित खंडेलवाल भी लंबित कार्यों और लोक सेवकों द्वारा रिश्वत की मांग के संबंध में हुई चर्चा में शामिल हुए। इसके बाद आगे की सत्यापन कार्यवाही की गई। जिसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और सीजीएसटी कार्यालय में दबिश दी जहां से रिश्वत लेते रंगे हाथों सचिन खरे, निरीक्षक, उप, सहायक आयुक्त विवेक वर्मा को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। अब दोनों को सोमवार तक रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
