कलेक्टर के नाम से फर्जी व्हाट्सएप आईडी बनाकर साइबर ठगी का प्रयास

सतना: साइबर ठगों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे आम आदमी तो दूर, जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी यानी कलेक्टर को भी नहीं बख्श रहे हैं। सतना में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां अज्ञात जालसाजों ने वियतनाम का नम्बर उपयोग कर कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर व्हाट्सएप पर एक फर्जी प्रोफाइल बना ली और लोगों से पैसे मांगना शुरू कर दिया है। गनीमत रही कि जिस व्यक्ति को ठगों ने निशाना बनाया, उसने समझदारी दिखाई और ठगी का शिकार होने से बच गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने टीकमगढ़ निवासी मनोज को निशाना बनाया। ठगों ने वियतनाम के एक नए नंबर पर कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस की फोटो लगाई और खुद को कलेक्टर बताते हुए मनोज को मैसेज किया। बातचीत के दौरान ठगों ने मनोज से 50 हजार रुपए की मांग की। उन्होंने दिल्ली स्थित ओवरसीज बैंक का एक खाता नंबर साझा किया और निर्देश दिया कि यह राशि ‘नीलिवी’ नाम के खाता धारक के अकाउंट में तुरंत ट्रांसफर कर दी जाए।

ठगों की चालाकी तब पकड़ी गई जब मनोज ने उनसे सवाल कर लिया। मनोज ने पूछा कि सर, आपका नंबर क्यों बदल गया है? इस पर शातिर ठग ने बहाना बनाते हुए जवाब दिया मेरा मोबाइल ऑफिस में छूट गया है, इसलिए मैं इस नंबर से संपर्क कर रहा हूं। यही जवाब सुनकर मनोज को शक हो गया। उन्होंने तुरंत सतर्कता बरती और पैसे ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया। उनकी इस सूझबूझ से 50 हजार रुपए की ठगी टल गई है।
कलेक्टर ने जारी की सार्वजनिक अपील
मामला संज्ञान में आते ही सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने पुलिस और साइबर सेल को जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन्होंने आम जनता और सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अलर्ट जारी किया है। सतना पीआरओ ने एलर्ट जारी कर कहा है कि उनके नाम और फोटो का उपयोग कर कुछ विदेशी नंबरों से व्हाट्सएप मैसेज किए जा रहे हैं। उन्होंने अपील की है कि अगर कोई भी व्यक्ति उनके नाम से कॉल, मैसेज या व्हाट्सएप कर पैसों की मांग करे, तो उस पर बिल्कुल भरोसा न करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वरिष्ठ अधिकारी इस तरह सोशल मीडिया पर पैसे नहीं मांगता। ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

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