जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर शहर में ई-रिक्शा की अराजकता व धमाचौकड़ी को चुनौती दी गई है। नियमों में छूट के चलते ई-रिक्शॉ सडक़ों पर अव्यवस्था फैला रहे हैं। मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, परिवहन आयुक्त, कलेक्टर व जिला परिवहन अधिकारी जबलपुर को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
यह जनहित का मामला नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डा. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 2018 में एक अधिसूचना जारी कर मोटर व्हीकल एक्ट के नियम 66 के तहत ई-रिक्शॉ व बैटरी चलित वाहनों को छूट दी है। याचिका में नियम में किए गए संशोधन की वैधानिकता को चुनौती दी गई है।
दलील दी गई कि यह संशोधन मोटर व्हीकल एक्ट के मूल स्वरूप का उल्लंघन कर किया गया है। इस संशोधन के चलते ई-रिक्शॉ चलाने के लिए चालक को आरटीओं से ड्रायविंग लायसेंस और परमिट की आवश्यकता नहीं होती। चूंकि कानून में इनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान नहीं है, इसलिये बेधडक़ इनका संचालन बढ़ रहा है। कई ई-रिक्शॉ तो नाबालिग तक चला रहे हैं। ई-रिक्शॉ की अराजकता के चलते कुछ दिन पहले कलेक्टर ने हस्तक्षेप करते हुए स्कूलों में इन पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
