लॉस एंजिल्स, 17 दिसंबर (वार्ता) अमेरिकी नेशनल समुद्री एवं वायुमंडलीय प्राधिकरण (नोआ) ने एक सालाना रिपोर्ट में दावा किया है कि अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 तक आर्कटिक में सतह की हवा का तापमान 1900 के बाद सबसे गर्म रहा है।
प्राधिकरण ने मंगलवार को जारी अपने आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड में कहा कि शरद ऋतु 2024 और सर्दी 2025 आर्कटिक में खास तौर पर गर्म थे। रिकॉर्ड के अनुसार, ये क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर थे।
इस साल की रिपोर्ट एक ऐसे क्षेत्र का उल्लेख करती है जो बाकी ग्रह की तुलना में कहीं ज़्यादा तेज़ी से गर्म हो रहा है। नोआ के अनुसार, इनमें क्षेत्र का ‘अटलांटिफिकेशन’ शामिल है, यानी वह प्रक्रिया जो गर्म और खारे पानी को उत्तर की ओर ला रही है। नोआ की यह रिपोर्ट बोरियल प्रजातियों के आर्कटिक इकोसिस्टम में विस्तार और पिघलती बर्फीली मिट्टी के कारण नदियों में लौह और अन्य धातुओं के असर से ‘ज़ंग लगती नदियों’ पर भी रोशनी डालती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछला दशक आर्कटिक का सबसे गर्म दशक रहा है। साल 2006 से आर्कटिक का सालाना तापमान वैश्विक तापमान परिवर्तन की दर से दोगुने से भी ज़्यादा तेज़ी से बढ़ा है। अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 तक आर्कटिक में बारिश भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गयी। सर्दी, वसंत और शरद ऋतु के लिए मौसमी बारिश का कुल योग 1950 के बाद से पांच सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2025 में आर्कटिक सर्दियों की समुद्री बर्फ 47 साल की अपनी सबसे कम सालाना अधिकतम सीमा तक पहुंच गयी। हाल के अवलोकन भी आर्कटिक, ग्रीनलैंड और अलास्का में हिमनद (ग्लेशियर) और बर्फ के बड़े नुकसान का संकेत देते हैं। नोआ के अनुसार, हिमनदों का लगातार नुकसान वैश्विक समुद्री स्तर में लगातार वृद्धि में योगदान दे रहा है। यह आर्कटिक समुदायों में पानी की आपूर्ति को खतरा पैदा करता है, विनाशकारी बाढ़ के जोखिम को बढ़ाता है और भूस्खलन एवं सुनामी के खतरों को बढ़ाकर लोगों, बुनियादी ढांचे और तटरेखाओं को खतरे में डाल रहा है।
