
इंदौर. देवगुड़ारिया हिल्स के पास तेंदुए की सक्रियता दिखाई देने के बाद वन विभाग ने इलाके में चौकसी बढ़ा दी है. विभाग अब रात के समय थर्मल ड्रोन की मदद से वन्य प्राणियों की हरकतों पर निगरानी रखने की तैयारी कर रहा है, ताकि मानव वन्यजीव टकराव को समय रहते रोका जा सके.
10 दिसंबर की रात देवगुड़ारिया हिल्स क्षेत्र में तेंदुए के दिखने के बाद वन विभाग ने गश्त बढ़ाते हुए पूरे इलाके की सतर्कता बढ़ा दी है. मामले में डीएफओ प्रदीप मिश्रा ने बताया कि देवगुड़ारिया और रालामंडल का पहाड़ी इलाका वर्षों से तेंदुओं का प्राकृतिक मार्ग रहा है, लेकिन तेजी से बढ़ता शहरी विस्तार और नई कॉलोनियों के कारण अब वन्यजीवों के रास्ते सिमट रहे हैं. तेंदुए के मानव बस्तियों के पास आने की बड़ी वजह खुले में फेंका जा रहा कचरा है. इस कचरे पर निर्भर आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ जाती है और तेंदुए इन्हीं का पीछा करते हुए रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं. इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बढ़ती बस्तियां भी मानव वन्यजीव संपर्क को बढ़ा रही हैं. मामले में मिश्रा ने यह भी बताया कि पिछले वर्षों में हुए रेस्क्यू अभियान भी इसी समस्या की ओर संकेत करते हैं. समस्या के समाधान के लिए विभाग दो स्तरों पर काम कर रहा है. पहला नगर निगम के साथ मिलकर कचरा साफ कराने और आवारा कुत्तों की संख्या कम करने की कार्रवाई. दूसरा थर्मल ड्रोन आधारित चेतावनी प्रणाली विकसित करना. इसके तहत रात के समय ड्रोन से तेंदुए की चाल पर नजर रखी जाएगी, उनके मार्ग का नक्शा तैयार किया जाएगा और संवेदनशील क्षेत्रों को पहचानकर समय रहते अलर्ट जारी किया जाएगा. वहीं फील्ड स्टाफ को प्री एआईटीई अभ्यास के दौरान पगचिन्ह पहचानने, जहां ताज़े पुराने निशानों का अंतर समझने, शिकार स्थल की जाँच और सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को एम स्ट्राइप्स प्रणाली में दर्ज करने का प्रशिक्षण दिया गया है. वहीं तेंदुआ, सियार, लकड़बग्गा, जंगली बिल्ली और भेड़िये के पगमार्क में अंतर पहचानने का अभ्यास भी कराया जा रहा है. साथ ही वन विभाग ने आसपास के नागरिकों से अपील की है कि वे खुले में भोजन या कचरा न फेंकें, रात में बाहर कम निकलें और आवारा कुत्तों के अधिक संख्या वाले स्थानों की सूचना विभाग को दें. आने वाले दिनों में भी इलाके में गश्त जारी रहेगी. 12 दिसंबर को अभ्यास के अगले चरण में हिरण और अन्य शाकाहारी प्रजातियों की संख्या, उनके भोजन क्षेत्र और आवासीय हालात का आकलन किया जाएगा. इंदौर में तैयार हो रहा यह चेतावनी मॉडल आने वाले समय में उन शहरों के लिए भी उपयोगी हो सकता है, जहाँ मानव तेंदुआ संपर्क बढ़ रहा है.
