ग्यारह साल में कागजों से उतरकर क्रियान्वयन तक पहुंचे अधिकार: मिश्रा

नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (वार्ता) प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने बुधवार को कहा कि पिछले 11 साल में सरकार की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि लोगों के अधिकार कागजों से निकलकर क्रियान्वयन के चरण तक पहुंचे।

राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर यहां भारत मंडपम में आयोजित एक कार्यक्रम में श्री मिश्रा ने कहा कि 2014 से पहले के एक दशक में सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, मनरेगा और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम जैसे कानूनों के माध्यम से विकास के लिए अधिकार-आधारित दृष्टिकोण को अपनाया, लेकिन प्रभावी कार्यान्वयन के बिना अधिकारों को लागू करने से विश्वसनीयता कम हो गयी। उन्होंने कहा, “2014 से सरकार ने एक व्यापक दृष्टिकोण पर जोर दिया है और यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी पात्र लाभार्थी छूट न जाए। यह ‘कागजी अधिकारों’ से ‘कार्यान्वित अधिकारों’ की ओर एक बदलाव का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि डिजिटल इंफ्रास्टक्चर, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और विकसित भारत संकल्प यात्रा जैसे जागरूकता अभियानों की मदद से यह बदलाव लाया गया।

उन्होंने कहा कि मानवाधिकार का सबसे प्रभावी तत्व गरीबी उन्मूलन है और पिछले एक दशक में देश के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है।

डॉ. मिश्र ने दैनिक आवश्यकताओं की सुरक्षा के चार स्तंभों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहला स्तंभ, घर में सम्मान, आवास, जल, स्वच्छता, बिजली और स्वच्छ ईंधन के माध्यम से मजबूत हुआ है। प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत अभियान, सौभाग्य और उज्ज्वला योजना से लोगों के जीवन में बदलाव आया है।

दूसरा स्तंभ, सामाजिक सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा को बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना ने कोविड-19 के दौरान 80 करोड़ लोगों को भोजन उपलब्ध कराया और आयुष्मान भारत (पीएमजेएवाई) ने 42 करोड़ नागरिकों को कवर किया। बीमा, पेंशन और नये श्रम कानूनों ने अनौपचारिक और गिग कामगारों को लाभ पहुंचाया, जबकि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम जैसे सुधारों ने कमजोर समूहों के लिए सम्मान सुनिश्चित किया।

श्री मिश्रा ने तीसरा स्तंभ, समावेशी आर्थिक विकास, वित्तीय समावेशन और सशक्तिकरण को बताते हुए कहा कि जेएएम ट्रिनिटी ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण में क्रांति ला दी, 56 करोड़ से अधिक जन धन खातों ने बैंकिंग सुविधाओं से वंचित लोगों को औपचारिक वित्त से जोड़ा, और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और प्रधानमंत्री स्वनिधि जैसी योजनाओं ने उद्यम निर्माण को सक्षम बनाया। स्वयं सहायता समूहों, लखपति दीदियों, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और विधानसभाओं में ऐतिहासिक एक-तिहाई आरक्षण के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि न्याय और कमजोर समुदायों के संरक्षण का चौथा स्तंभ नये आपराधिक कानूनों, त्वरित न्यायालयों, पीओसीएसओ अधिनियम, विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम और आदिवासी समुदायों के लिए पीएम-जनमान अधिनियम के माध्यम से मजबूत किया गया। वैक्सीन मैत्री सहित मानवीय सहायता, मानवाधिकारों की सार्वभौमिकता में भारत के विश्वास को दर्शाती है।

 

 

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