महाकाल महोत्सव में दिखेगा सिंहस्थ 2018 का चित्रण

उज्जैन: भगवान महाकाल की नगरी एक बार फिर शिवभक्ति और भारतीय संस्कृति के एक महान पर्व का साक्षी बनने जा रही है. श्री महाकाल महोत्सव 14 से 18 जनवरी 2026 तक बड़े वैभव और श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाएगा. जिसका नाम रखा गया है महाकाल उत्सव, जिसमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की शामिल होंगे.
यह आयोजन सिर्फ मनोरंजन या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं, वैदिक ज्ञान, शिव आराधना और भारतीय आध्यात्मिक विरासत के जागरण का अद्वितीय उत्सव होगा.

पूरी महाकाल गाथा का होगा
उज्जैन में 84 महादेव सप्तसागर का क्या महत्व है पंचकोशी यात्रा क्यों निकल जाती है, सिंहस्थ का आयोजन क्यों और किस तरह से होता है. महाकाल की भस्म आरती क्यों की जाती है, महाकाल मंदिर का क्या इतिहास है, ऐसे सभी विषयों का चित्रण महोत्सव में किया जाएगा.

भव्य स्वरूप देने के लिए मंथन
मंगलवार को सिंहस्थ मेला कार्यालय में संभागायुक्त आशीष सिंह की अध्यक्षता में महोत्सव की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित हुई. बैठक में महाकाल महोत्सव को विश्वस्तरीय स्वरूप देने, भव्य उद्घाटन समारोह, सांस्कृतिक आयोजन, संत-समागम, कथाकारों और विचारकों को आमंत्रित करने सहित कार्यक्रम स्थल तय करने पर विस्तृत चर्चा की गई.

सिंहस्थ का आमंत्रण
बैठक में बताया गया कि जैसे सिंहस्थ कुंभ में साधु-संत, दर्शन और आध्यात्मिक वातावरण से पूरा उज्जैन जगमगा उठता है, वैसे ही महाकाल महोत्सव भी धर्म, संस्कृति और ज्ञान का संगम बनकर करोड़ों लोगों तक सनातन संदेश पहुंचाएगा. महाकाल की नगरी से निकलने वाला यह सांस्कृतिक आमंत्रण सिंहस्थ 2028 की भी आध्यात्मिक भूमिका तैयार करेगा.

यह रहे मौजूद
बैठक में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक, महंत विनीत गिरी महाराज ,महंत रामेश्वर दास ,महाकाल महोत्सव समिति के सदस्य पद्मश्री भगवतीलाल राजपुरोहित, महाकाल मंदिर प्रशासक, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी, पंडित सूर्य नारायण व्यास के सुपुत्र पंडित राजशेखर व्यास, पंडित आशीष शर्मा,रवि सोलंकी, ,डॉ. रमण सोलंकी, प्रशांत पौराणिक, डॉ. शैलेन्द्र शर्मा, सहायक जनसंपर्क अधिकारी कपिल मिश्रा सहित प्रशासनिक अधिकारी, विद्वान, कलाकार, महंत और पुरोहितगण उपस्थित रहे.

भक्ति संस्कृति और वैदिक परम्परा
धार्मिक नगर उज्जैन में यह आयोजन महाकालेश्वर की भक्ति, संस्कृति और वैदिक परंपराओं के दिव्य संदेश को विश्व तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा. महाकाल की नगरी में पांच दिवसीय महोत्सव सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिवत्व की अनुभूति, संस्कृति की महिमा और धर्म की विराटता का आलौकिक अनुभव बनकर इतिहास में दर्ज होगा. महाकाल नगरी का वैभव अब एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है.

देशभर के विद्वानों, कलाकारों, संतो को किया जाएगा आमंत्रित
नवभारत से चर्चा में उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि मंगलवार को रूपरेखा तय की गई है. इसमें और मंथन किया जाएगा, साथ ही देश भर के विशेष विद्वानों को प्रमुख कलाकारों को संतो को भी आमंत्रण दिया जाएगा. कई विशेष उद्बोधन भी इस दौरान होंगे. प्रदर्शनी, चित्रकला का आयोजन भी होगा. नृत्य प्रस्तुतियां भी होगी. महाकाल मन्दिर के वैभवशाली इतिहास पर कई सारे कार्यक्रम होंगे

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