
जबलपुर। मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में जबलपुर उत्तर–मध्य के विधायक डॉ. अभिलाष पाण्डेय ने क्षेत्र के विकास और नागरिक समस्याओं से जुड़े कई अहम मुद्दों को रखा। उन्होंने युवाओं के कौशल विकास, बच्चों की डिजिटल लत, ई-रिक्शा व्यवस्था, खेल सुविधाओं और तकनीकी शिक्षा से जुड़े सवालों पर सरकार से जवाब मांगा। डॉ. पाण्डेय ने युवाओं के कौशल विकास को लेकर चिंता जताते हुए बताया कि विभिन्न योजनाओं के तहत 34,780 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, लेकिन उनमें से मात्र 6,697 को ही रोजगार प्राप्त हुआ। साथ ही जबलपुर के लिए आगामी वर्ष में केवल 220 युवाओं के प्रशिक्षण लक्ष्य को उन्होंने अपर्याप्त बताते हुए शहर में विशेष प्रशिक्षण शिविर और रोजगार मेले आयोजित करने की मांग की। सत्र के दौरान डॉ. पाण्डेय ने खेल, तकनीकी शिक्षा, एमपीईसेवा पोर्टल की सेवाओं, वायु प्रदूषण, खाद्य मिलावट, अव्यवस्थित ओवरहेड केबल, आवारा पशु नियंत्रण, भूमि अधिग्रहण की अनियमितताओं और प्रस्तावित फ्लाईओवर जैसे कई शहरी मुद्दों पर भी समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।
मोबाइल की लत से मायोपिया के मामले बढ़े
बच्चों में बढ़ती मोबाइल की लत पर ध्यान आकृष्ट करते हुए उन्होंने एम्स की रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसमें मायोपिया के मामलों में वर्ष 2001 के 7 प्रतिशत से 2021 में 21 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि देश में 10 से 14 वर्ष के 83 प्रतिशत बच्चे मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने नो गैजेट ज़ोन और जन-जागरण अभियान चलाने की आवश्यकता बताई।
ई- रिक्शा पर कलर कोडिंग व्यवस्था लागू नहीं हो पाई
ई-रिक्शा व्यवस्था की अव्यवस्था पर सवाल उठाते हुए डॉ. पाण्डेय ने बताया कि जुलाई 2025 में 4,815 ई-रिक्शाओं की कलर कोडिंग की गई थी, लेकिन व्यवस्था लागू नहीं हो पाई। परिवहन विभाग द्वारा अब तक 1,027 चालान और 5 लाख रुपए से अधिक के जुर्माने की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई, परंतु चालकों के प्रशिक्षण के लिए कोई विशेष योजना नहीं है।
