कबाड़ की बस में बना आश्रय स्थल, अभी तक नहीं पहुंचा एक भी निराश्रित

जबलपुर: शीतलहर शहर में शुरू हो चुकी है और दीनदयाल चौक स्थित आईएसबीटी में नगर निगम द्वारा कबाड़ की बस में बनाया गया आश्रय स्थल अभी तक एक भी निराश्रित, असहाय के वहां पहुंचने की राह देखता नजर आ रहा है। उधर शहर के कई सार्वजनिक जगहों पर अलाव की लकड़ी की व्यवस्था के लिए टैंडर अभी तक पूरा नहीं किया गया है।

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अलाव की लकड़ी का टैंडर पूरा होने में अभी 8 से 10 दिन और लगेंगे। मतलब असहाय, निराश्रित लोगों को अलाव से अभी करीब 10 दिन और परेशानी में काटने होंगे। हालांकि उद्यान विभाग के जिम्मेदारों ने ये कहा है कि टैंडर भले ही नहीं हुआ हो लेकिन शहर के सभी सार्वजनिक स्थलों में लकड़ी मुहैया कराई जा रही है लेकिन जमीनी हकीकत में निराश्रित, असहाय लोग ठंड में शाम ढलते ही ठिठुरते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों पहले धनवंतरी नगर चौक में ठंड की वजह से एक असहाय 60 वर्षीय बुजुर्ग की मौत भी हो चुकी है।
3 साल पहले बस में बनाया गया था आश्रय स्थल
जानकारी के अनुसार करीब तीन साल पहले तत्कालीन निगमायुक्त स्वप्रिल वानखेड़े के कार्यकाल के समय पुरानी कबाड़ की एक बस को आश्रय स्थल के रूप में तैयार किया गया था और ये बस आईएसबीटी में खड़ी कराई गई थी जिसमें ठंड के समय निराश्रित लोग जाकर एक आश्रय स्थल में रहकर गुजर बसर कर सकें और ठंड से बच सकें।
जबलपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड के सीईओ सचिन विश्वकर्मा ने नवभारत को बताया कि नगर निगम सीमा अंतर्गत शीत ऋतु के प्रभाव से बचाव के लिए शहरी बेघरों, फुटपाथ पर रहने वाले आवासहीनों और निराश्रित जनों को पिछले कई सालों से ठंड से बचाने नगर निगम के आश्रय स्थलों में ठहराने का कार्य कराया जाता रहा है।

इनका कहना है
–अभी अलाव की लकड़ी के टैंडर की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने में 8 से 10 दिन और लगेंगे। फिलहाल अभी ठंड से राहत देने निगम के पास मौजूद पुरानी लकड़ियों को चीरकर अलग-अलग हिस्सा सार्वजनिक जगहों पर अलाव जलाने के लिए भिजवाया जा रहा है।
—आलोक शुक्ला, उद्यान प्रभारी, नगर निगम।
–जब शहर के रैन बसेरा, आश्रय स्थल निरारित लोगों से फुल हो जाते हैं तो फिर दीनदयाल स्थित आईएसबीटी में मौजूद कबाड़ की एक बस में बनाए गए आश्रय स्थल का उपयोग किया जाता है। अभी तक ऐसी स्थिति नहीं आई है कि इस ऑप्शन का इस्तेमाल किया गया हो।
सचिन विश्वकर्मा, सीईओ, जेसीटीएसएल जबलपुर।

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