रीवा: गुणवत्तापूर्ण विद्युत सप्लाई देने और कृषि फीडर को अलग करने के लिये आरडीएसएस योजना जिले में शुरू की गई. ठेका कम्पनी को दो साल में फीडर सेपरेशन का काम पूरा करना था लेकिन कछुआ गति से चल रहे काम एवं पेटी ठेकेदारो को काम बांटने के कारण योजना का हाल बेहाल हो गया है. लिहाजा फीडर सेपरेशन का कार्य अधर में लटका हुआ है. पेटी ठेकेदार सामान लेकर घर बैठ गये है.271 फीडर सेपरेशन का काम करना था और अभी तक केवल 137 फीडर ही पूरे हो पाए है, शेष कार्य अधर में लटके है. दो साल पूरे होने के बाद कम्पनी को एक साल का और मौका दिया गया.
जिसकी समय सीमा खत्म होने वाली है और अभी तक 60 फीसदी ही काम पूरा हो पाया है. 2023 में केन्द्र सरकार ने आडीएसएस योजना शुरू की थी. योजना का उद्देश्य था कि बिजली संचालन में सुधार हो और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिले. कृषि फीडरो को अलग किया जाय. अशोक इन्फ्रा को इसका काम मिला, कम्पनी ने शुरू में ही काम के प्रति लापरवाही दिखाई. जिसके कारण समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी फीडर सेपरेशन का काम पूरा नही हो पाया.
इतना ही नही योजना को लेकर मुख्य सचिव तक मामला पहुंचा. उसके बाद भी कम्पनी के कार्यप्रणाली में कोई सुधार नही हुआ. जिले में बैठे विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण यंत्री से लेकर नोडल अधिकारियों ने भी कोई ध्यान नही दिया. किसानो को 10 घंटे बिजली फीडर सेपरेशन से मिलनी थी. जिस तरह से काम चल रहा है उससे नही लगता कि एक साल में भी फीडर सेपरेशन का काम पूरा हो जाएगा.
योजना में होने ये यह काम, नही हुए पूरे आरडीएसएस योजना के तहत फीडर सेपरेशन 271 करने थे, इसके साथ ही 33 केव्ही उपकेन्द्र 23 बनाए जाने थे और 33/11 केव्ही उपकेन्द्र 6 बनाए जाने थे, जिसमें सभी पूरे हो चुके है. इसी तरह कैपेसिटर बैंक 31 बनाए जाने थे जो बन गये है. 33 केव्ही उपकेन्द्र के कार्य अभी अधूरे है तो वही 271 में केवल 137 फीडर सेपरेशन का काम पूरा हो पाया है.
कम्पनी ने खुद फीडर सेपरेशन का काम करने में रूचि नही दिखाई और रीवा-मऊगंज के स्थानीय ठेकेदारो को पेटी पर काम दे दिया. नतीजन स्थानीय ठेकेदारो ने काम नही किया, कई जगह पोल खड़े है डीपी खड़ी है लेकिन तार-केबल नही लगाया गया. कम्पनी से स्थानीय पेटी ठेकेदारो ने सामग्री तो ले ली और काम पूरा नही किया. उधर पेटी ठेेकेदारो का कहना है कि कम्पनी ने भुगतान पूरा नही किया. जिसके कारण वह काम नही कर रहे
