साक्षी केसरवानी
भोपाल: शासकीय सांदीपनि उच्च माध्यमिक विद्यालय निशातपुरा जो कभी कमरे की बंद दीवारों में अपना अस्तित्व खो चुका था। टूटी मेज कुर्सियां सीलन भरी दीवारें और टपकती छत देखकर यह कहना मुश्किल था कि यहां भविष्य संवर सकता है। लेकिन बच्चों की रचनात्मक सोच और शिक्षकों की मेहनत ने इस स्कूल की किस्मत ही बदल दी। आज यही विद्यालय शहर के सबसे बेहतर स्कूलों में गिना जा रहा है। न केवल स्कूल की रंगत बल्कि शिक्षा में भी अव्वल रहते हुए सत्र 2024–25 में हाई स्कूल के 100 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। वहीं इंटरमीडिएट में भी 95 प्रतिशत से अधिक बच्चों ने सफलता हासिल की।
कबाड़ से चमकाया स्कूल
स्कूल की दीवारों पर पेंट नहीं बल्कि विद्यार्थियों के द्वारा की गई चित्रकारी है। खेल मैदान से लेकर सभी कक्षाओं में छात्र छात्राएं स्वयं कलात्मक शैलियों को निखारते हैं। परिसर में उपलब्ध कई वस्तुएं, जो उपयोग में नहीं हैं, विद्यार्थी ऐसी वस्तुओं से आर्ट और क्राफ्ट की वस्तुएं बना रहे हैं। इसमें वेस्ट टीन से गमले, टायर से पौधे की बाउंड्रीज बनाना, इस्तेमाल चार्टपेपर से झूमर बनाना जैसे कई कार्य शामिल हैं। इतना ही नहीं छात्रों द्वारा बनाई ये वस्तुएं स्कूल परिसर की शोभा तो बढ़ाती ही हैं , बल्कि उनमें कलात्मक शैली को भी जन्म दे रही हैं।
कमी नहीं दिखने देते छात्र
स्कूल के प्राचार्य राकेश चंद्र जैन बताते हैं कि विद्यालय में किसी भी कोने में छात्रों को कोई कमी नजर आती है तो वह मध्यान्ह या खाली समय में स्वयं ही अपने हाथों की कला निखारने लगते हैं। जिसके बाद वो खाली कोना भी नए रंगों में चमकता नजर आता है। इन कार्यों में विद्यार्थियों के साथ शाला के शिक्षक में भी उनका भरपूर सहयोग देते हैं।
एक नजर में समझें
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज द्वारा 2022 में शुरू किए गए सीएम राइस स्कूल की शुरुवात की. जो महज एक कल्पना नहीं बल्कि वास्तव में प्रदेश के विद्यार्थियों को ए क्लास की शिक्षा देने की मुहिम थी। इसे 2025 में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सांदीपनि विद्यालय का नाम दिया और इसे गुरुकुल शिक्षा पद्धति की ओर ले जाने की कोशिश की। फिलहाल शहर में स्थित 8 सांदीपनि विद्यालय अपनी एक अलग पहचान और शिक्षा के लिए विख्यात हैं।
