भोपाल: भारत भवन के बहिरंग मुक्ताकाश मंच पर रविवार की शाम संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। तीन दिवसीय आठवां हृदय दृश्यम संगीत समारोह सुर, ताल और ऊर्जा की त्रिवेणी बनकर समापन की ओर बढ़ा। झील किनारे बहती ठंडी हवा और खुले आसमान के नीचे हुए कार्यक्रम ने श्रोताओं को दुर्लभ अनुभूति कराई। समारोह की शुरुआत सुविख्यात बांसुरी वादक पंडित राकेश चौरसिया की मधुर प्रस्तुति से हुई।
उनकी बांसुरी से निकले राग भीमपलासी के शांत और भावपूर्ण सुरों ने माहौल को सुरमय बना दिया। मध्य लय रूपक की गत और द्रुत तीन ताल की प्रस्तुति के बाद राग पहाड़ी में बजाई गई धुन ने श्रोताओं को मानो किसी अलौकिक लोक में पहुंचा दिया हो। इनके साथ तबले पर रामेंद्र सिंह सोलंकी ने प्रभावी संगत दी।इसके बाद जब ब्रह्म फ्यूजन बैंड ने मंच संभाला, उनकी ऊर्जामयी शैली और आधुनिक संगीत के नवाचारों ने पूरा वातावरण झंकृत कर दिया।
रविवार की शाम कलाकारों ने भारतीय संगीत की आत्मा और वर्ल्ड म्यूजिक की लय को जिस प्रभाव के साथ पिरोया, उसने श्रोताओं में उत्साह की लहर पैदा कर दी।
शाम की अंतिम प्रस्तुति ग्रैमी अवार्ड विजेता वी सेल्वगणेश के पंचाक्षरा समूह की रही। कंजीरा, घटम, कोनक्कल और मोरसिंग के संगम ने ताल वाद्य की अद्भुत दुनिया से परिचित कराया। शिव तांडव से आरंभ हुई प्रस्तुति में सेवन एंड ए हाफ जैसी विशेष कंपोजिशन ने दर्शकों को रोमांचित किया।
