
अनूपपुर।अमृत योजना के तहत अनूपपुर रेलवे स्टेशन का कायाकल्प भले ही तेज रफ्तार से चल रहा हो, लेकिन स्टेशन परिसर के बाहर स्वच्छता की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। बाहरी क्षेत्र में सुलभ शौचालय न होने के कारण यात्रियों व स्थानीय रहवासियों को गंभीर दुर्गंध और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति इतनी बदहाल है कि लोग इसे ‘नरक जैसी परिस्थिति’ कहकर भड़क उठे हैं।
भारतीय गण वार्ता (भगवा) पार्टी के जिला महासचिव वरुण चटर्जी ने साथी कार्यकर्ताओं के साथ स्टेशन अधीक्षक के माध्यम से 11 अप्रैल 2025 को महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर के नाम पूर्व मे ज्ञापन सौंपा है,जिसमें स्टेशन के बाहर तुरंत सुलभ शौचालय निर्माण की मांग उठाई गई है।
अमृत योजना का कायाकल्प, पर स्वच्छता में बड़ी चूक
योजना के तहत स्टेशन को आधुनिक बनाने, सुंदर बनाने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ देने के करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
अनूपपुर स्टेशन एक महत्वपूर्ण जंक्शन होने के कारण प्रतिदिन हजारों यात्री यहाँ आते-जाते हैं।
लेकिन स्टेशन के बाहर सुलभ कंपलेक्स शौचालय न होने से लोग मजबूरी में खुले में मूत्र विसर्जन कर रहे हैं, जिससे बदबू के कारण आसपास के यात्रियों, दुकानदारों और रहवासियों का जीना दूभर हो गया है।स्टेशन के अंदर मौजूद शौचालय का उपयोग करने के लिए प्लेटफॉर्म टिकट लेने की अनिवार्यता लोगों को रोकती है। इस कारण अधिकांश लोग सामने स्थित खाली जगह का ही उपयोग कर रहे हैं, जिससे दुर्गंध और गंदगी फैल रही है।
*अमृत योजना में ‘विष घोल’ रहा स्वच्छता संकट*
स्टेशन के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी सिर्फ एक सुलभ शौचालय की कमी ने पूरे अमृत योजना की छवि धूमिल कर दी है।यात्री बार-बार शिकायत कर रहे हैं कि स्टेशन के सामने फैलती गंदगी और सांस रोक देने वाली दुर्गंध के कारण योजना का औचित्य ही कमजोर पड़ रहा है।
