ग्वालियर: मेडिटेशन गुरु, उपाध्याय श्री 108 विहसन्त सागर मुनिराज ससंघ के सानिध्य में पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन वरैया मंदिर, दानाओली में प्राचीन जिनालय के नव-निर्माण का शुभारंभ हुआ। यह विहसन्त सागर मुनिराज द्वारा संपादित 76वां नवनिर्माण है, जो धर्म-प्रभावना की पावन परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान करता है। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को आशीर्वचन देते हुए.
मेडिटेशन गुरु मुनिराज ने कहा कि मनुष्य को कभी भी उपकार नहीं भूलना चाहिए। एक अक्षर का उपदेश देने वाला भी उपकारी होता है। उन्होंने धर्म और आत्म-साक्षात्कार के महत्व पर जोर दिया। वरैया दिगंबर समाज का एकमात्र मंदिर दानाओली में स्थित था। मैं जब यहां धर्म कार्य के लिए आता था तो यहां की पूर्व समितियों के सदस्य कहते थे कि यह मंदिर छोटा है, इसका पुनर्निर्माण करना है। तब मैं कहता था कि जब समय आएगा तो अपने आप मंदिर का पुनर्निर्माण हो जाएगा। प्रभु की कृपा से आज मंदिर का भूमि-पूजन भी हो गया और विशाल मंदिर बनने की ओर अग्रसर है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने कहा कि मैं यह मानता हूं कि प्रभु कृपा और संत कृपा बिना नियति के नहीं मिलती। आज यह आयोजन नहीं होता तो मैं भोपाल में होता है। जैसे ही मुझे जब मालूम चला कि आज पूज्य गुरूजी उपाध्याय श्री 108 विहसन्त सागर जी मुनिराज ससंघ का आशीर्वाद व दर्शन करने का सौभाग्य मिलेगा तो मैंने सोचा यह काम पहले सारे काम बाद में देखेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रभु ने हम सभी को विशेष काम दिया है और सभी अपने-अपने काम कर रहे हैं। हम सब का सौभाग्य है की बहुत ही प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण पुनर उत्थान के लिए स्वयं हमें गुरु जी का आशीर्वाद मिल रहा है। यह सिर्फ क्षेत्र के श्रद्धालुओं व सभी स्वावलंबी व पूरे ग्वालियर के लिए सौभाग्य की बात है। गुरूजी द्वारा यह संपादित 76 वां नवनिर्माण है और प्रभु ने उन्हें यह पुण्य काम दिया है मैं प्रभु से विनती करूंगा कि उनका यह सिलसिला आगे भी ऐसे ही चलता रहे।
