नई दिल्ली, 06 दिसंबर, 2025: सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों को दान में मिलने वाले पैसे को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि मंदिर को दान में दिया गया पैसा देवता का होता है। इसका इस्तेमाल किसी सहकारी बैंक को बचाने या उसको समृद्ध बनाने के लिए नहीं हो सकता।
सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता बैंकों से पूछा कि इसमें गलत क्या है कि मंदिर का पैसा सहकारी बैंक के बजाय किसी नेशनल बैंक में जाए जो ज्यादा ब्याज दे सके? उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर का पैसा देवता का होता है, इसलिए इसे सुरक्षित करना, संरक्षित करना और सिर्फ मंदिर के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। यह किसी सहकारी बैंक के अस्तित्व का आधार नहीं बन सकता।
केरल के कुछ सहकारी बैंकों (मनथनावाडी को-ऑपरेटिव अर्बन सोसाइटी और थिरुनेल्ली सर्विस कोऑपरेटिव बैंक) ने केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें थिरुनेल्ली मंदिर देवास्वोम की जमा राशि 2 महीने में लौटाने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकों की याचिकाएं खारिज कर दीं, हालांकि उन्हें वक्त बढ़ाने के लिए केरल हाईकोर्ट में अर्जी देने की आजादी दी।

